रांची में है एक ऐसा स्कूल जहां बदल दिए जाते हैं बच्चों के नाम

रांची. झारखंड की राजधानी रांची के बरियातू में एक सरकारी स्कूल है जिसकी आज खूब चर्चा है. जहां बच्चों के ज्ञान के स्तर को बढ़ाने के लिए नए प्रयोग के तहत उनके अटेंडेंस के दौरान वह यस सर या यस मैम की जगह राज्य, राजधानी, देश, फल और फूलों के नाम बता कर अपना अटेंडेंस दर्ज करवाया जाता है. जिससे बच्चों का जनरल नॉलेज मजबूत हो रहा है.

सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई का स्तर अलग-अलग है. प्राइवेट स्कूल को लोग ज्यादा तवज्जो देते हैं लेकिन राजधानी रांची में एक ऐसा सरकारी स्कूल भी है. जहां बच्चों की पढ़ाई देख लोग हैरत में हैं. दरअसल यह स्कूल है राजकीयकृत मध्य विद्यालय, जो बरियातू में पड़ता है. जहां बच्चों को नए तरीकों से पढ़ाया जा रहा है. कई मामलों में इस स्कूल के छात्र-छात्राएं प्राइवेट और महंगे स्कूलों को भी मात दे रहे हैं.

अगर एक बच्चा राज्य होता है तो दूसरा बच्चा राजधानी

स्कूल के प्रिंसिपल नसीम अहमद बताते हैं कि नए प्रयोग के तहत बच्चों के अटेंडेंस में जो समय गुजरता है. उसे पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और क्लास के बच्चों का जोड़ा बनाया गया है. अगर एक बच्चा राज्य होता है तो दूसरा बच्चा राजधानी बन जाता है. साथ ही बच्चों को नदियों, राज्य, राजधानी, देश, फल और फूल के नामों को याद करवाने के मकसद से उनके अटेंडेंस उन्हीं नामों के आधार पर लिए जाते हैं.

ये भी पढ़ें- स्कूलों में बच्चे क्यों नहीं आ रहे, इसकी चिंता करे सरकार : रामटहल चौधरी

खेल-खेल में पढ़ाई

जब टीचर किसी छात्र का नाम पुकारती हैं तो वह राज्य का नाम बताता है. वहीं, उसके साथ बैठा दूसरा छात्र नाम पुकारे जाने पर उसकी राजधानी बताता है. उसी तरह अलग-अलग क्लासों में अटेंडेंस पुकारे जाने पर बच्चे नदियों के नाम, फलों के नाम या फूलों के नाम बताते हैं. जिससे बच्चों को पढ़ाई में बेहतर सहयोग मिलता है और उनकी जनरल नॉलेज भी बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि यह एक प्रकार का नवाचार है और इसी महीने से इसे शुरू किया गया है और रिपोर्ट देखने पर यह पता चला है कि बच्चे खेल-खेल में इन चीजों को सीख पा रहे हैं.

लक्ष्य, सुगम और सुबोध ग्रुप्स

प्रिंसिपल ने बताया कि सरकार की महत्वकांक्षी योजना ज्ञान सेतु के तहत बच्चों को टेस्ट के माध्यम से तीन ग्रुपों में भी बांटा गया है. लक्ष्य, सुगम और सुबोध तीन ग्रुप बनाए गए हैं और बच्चों की बौद्धिक क्षमता के अनुसार इन ग्रुपों में रखा गया है. लक्ष्य समूह के बच्चों पर ज्यादा मेहनत की जा रही है और उसके बाद सुगम ग्रुप के बच्चों को सुबोध ग्रुप में पहुंचाने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही किसी भी सामान के रैपर पर लिखे उसके नाम, उसके वजन, उसके मूल्य को भी पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. जिससे बच्चे जल्द हिंदी और इंग्लिश की स्पेलिंग, जोड़ घटाव, वजन की जानकारी और मूल्य की जानकारी को समझ पा रहे हैं.