रांची. गुडू पंचायत के किसान मौसम की मार झेल रहे हैं. अचानक आंधी तूफान और बारिश की वजह से उनके फसलों को खासा नुकसान हो रहा है. इसके साथ ही फसलों में कीड़े भी लग जा रहे हैं. वहां के किसान बताते हैं कि कीड़े से बचाने के लिए दवाईयों का छिड़काव किया जाता है. अचानक बारिश आंधी पानी आने से उन दवाइयों का असर खत्म हो जाता है. जिससे बड़े पैमाने पर फसलों में कीड़े लग जा रहे हैं. उनके फसल नष्ट हो जाते हैं. फसल में कीड़े लग जाने की वजह से बाजार में उसका सही मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है. उत्पादन का आधा से ज्यादा हिस्सा कीड़ों की वजह से बर्बाद हो जा रहा है.

वहीं, राजधानी के आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों का एक ही रोना है कि खेती बारी करने में उन्हें सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही है. किसान 6 महीने कुएं पर आश्रित होकर खेती-बारी करते हैं तो बाकी के 6 महीने बरसात पर निर्भर रहते हैं. अगर कुआं सूखा तो उनकी खेती बंद हो जाती है. पंचायत स्तर पर किसानों और ग्रामीणों के लिए जो सरकारी योजनाएं हैं. उसका लाभ पहुंचाने का प्रयास जरूर किया जा रहा है. किसानों के लिए ठोस रणनीति सरकार की ओर से अब तक तैयार नहीं गई है. यही वजह है कि दूर-दूर तक खेत सूखे दिखाई पड़ते हैं. सिर्फ बरसात के समय में ही धान की खेती हो पाती है. जबकि पानी की व्यवस्था होने पर बड़े पैमाने पर सालों भर खेती करना आसान हो सकता है.

गुडू पंचायत के युवा किसान पंकज उराव बताते हैं कि यहां सब्जी की भरपूर मात्रा में खेती होती है और उसका उत्पादन भी बेहतर होता है. लेकिन, 6 महीने सब्जी की खेती कुएं के पानी पर निर्भर होकर किसानों को करना पड़ता हैं. जबकि बचे 6 महीने में बरसात के पानी से खेती हो पाती है. क्योंकि डीप बोरिंग की व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है.

उन्होंने बताया कि इस वर्ष खेती की स्थिति बहुत खराब है. क्योंकि बे मौसम बरसात के वजह से फसल के फल झड़ जाते हैं. कीटनाशक के छिड़काव के बाद बारिश की वजह से उनका असर खत्म हो जाता है. जिससे सब्जियों में कीड़े लग जा रहे हैं. जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. फसलों का सही मूल्य भी बाजार में नहीं मिल पा रहा है.