इस गर्मी बुला रही हैं हिमाचल की वादियां

हिमाचल की वादियां

नई दिल्ली. अगर आप देश में पड़ रही भीषण गर्मी से राहत पाने के साथ ही गर्मियों की छुट्टी का मजा लेना चाहते हैं तो आप हिमाचल प्रदेश का रूख कीजिए. यहां हिमालय की दिलकश, बर्फ से ढकी चोटियां, चारों ओर हरेभरे खेत और शांत वातावरण आपका मन मोह लेगा. यही कारण है कि यह राज्य हर साल पूरी दुनिया के लाखों पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है.

हिमाचल प्रदेश अपनी खूबसूरत वादियों के लिए पहचान जाता है. सबसे खास बात है कि यहां सभी के लिए कुछ न कुछ मौजूद है. यहां चाहे आप धर्म की दृष्टि से आएं या फिर एडवेंचर के लिए. हिमाचल आकर आप किसी भी मंदिर में दर्शन के अलावा ट्रैकिंग, पैरासेलिंग, पैरा ग्लाइडिंग, पर्वतारोहण, स्कीइंग और आइस स्केटिंग जैसी एक्टिविटी को अंजाम दे सकते हैं.

हिल स्टेशनों की रानी है शिमला

भारत के साथ-साथ पूरी दूनिया में अपने अनुपम सौंदर्य के कारण हिमाचल प्रदेश की राजधानी की राजधानी शिमला सैलानियों का प्रिय दर्शनीय स्थल है. यहां पूरे वर्ष ठण्‍डी हवाएं बहती हैं. हिमाचल प्रदेश की राजधानी और ब्रिटिश कालीन समय में ग्रीष्‍म कालीन राजधानी शिमला राज्‍य का सबसे महत्‍वपूर्ण पर्यटन केन्‍द्र है. यहां का नाम देवी श्‍यामला के नाम पर रखा गया है जो काली का अवतार हैं. शिमला लगभग 7267 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह अर्ध चक्र आकार में बसा हुआ है. यहां घाटी का सुंदर दृश्‍य दिखाई देता है और महान हिमालय पर्वती की चोटियां चारों ओर दिखाई देती हैं. शिमला एक पहाड़ी पर फैला हुआ है जो करीब 12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है. इसके पड़ोस में घने जंगल और टेढ़े-मेढे़ रास्ते हैं, जहां पर हर मोड़ पर मनोहारी दृश्य देखने को मिलते हैं. यह एक आधुनिक व्यावसायिक केंद्र भी है.

शिमला विश्व का एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल है. यहां प्रत्येक वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग भ्रमण के लिए आते हैं. बर्फ से ढकी हुई यहां की पहाडि़यों में बड़े सुंदर दृश्य देखने को मिलते हैं जो पर्यटकों को बार-बार आने के लिए आकर्षित करते हैं. शिमला संग्रहालय हिमाचल प्रदेश की कला एवं संस्कृति का एक अनुपम नमूना है, जिसमें यहां की विभिन्न कलाकृतियां विशेषकर वास्तुकला, पहाड़ी कलम, सूक्ष्म कला, लकडि़यों पर की गई नक्काशियां, आभूषण एवं अन्य कृतियां संग्रहित हैं.

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शिमला में दर्शनीय स्थलों के अतिरिक्त कई अध्ययन केंद्र भी हैं, जिनमें लार्ड डफरिन द्वारा 1884-88 में निर्मित भारतीय उच्च अध्ययन केंद्र बहुत ही प्रसिद्ध है. यहां कुछ ऐतिहासिक सरकारी भवन भी हैं, जैसे वार्नेस कोर्ट, गार्टन कैसल व वाइसरीगल लॉज ये भी बड़े ही दर्शनीय स्थल हैं. चैडविक झरना भी एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है. इसके साथ ही ग्लेन नामक स्थल भी है. इसके समीप बहता हुआ झरना और सदाबहार जंगल बहुत ही आकर्षक हैं.

देवताओं की घाटी कुल्लू

कुल्लू घाटी को पहले कुलंथपीठ कहा जाता था. कुलंथपीठ का शाब्दिक अर्थ है रहने योग्‍य दुनिया का अंत. कुल्‍लू घाटी भारत में देवताओं की घाटी रही है. यहां के मंदिर, सेब के बागान और दशहरा हजारों पर्यटकों को कुल्‍लू की ओर आकर्षित करते हैं. यहां के स्‍थानीय हस्‍तशिल्‍प कुल्‍लू की सबसे बड़ी विशेषता है. कुल्लू की जो हिमालय के करामाती स्वर्ग से कम नहीं. कुल्लू देवताओं की घाटी, हिमाचल प्रदेश का एक खूबसूरत जिला है. घाटी का यह नाम इसलिये पड़ा क्योंकि यह विश्वास है कि एक समय कई हिंदू देवी-देवताओं और दिव्य आत्माओं के लिए घर था.

ब्यास नदी के तट पर 1230 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, यह अपने शानदार प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है. मूलत: कुल-अन्ती-पीठ के रूप में जाना गया, जिसका अर्थ है बसने योग्य दुनिया का सबसे दूर बिंदु. कुल्लू का रामायण, महाभारत, विष्णु पुराण जैसे महान भारतीय महाकाव्यों में भी उल्लेख है. त्रिपुरा के निवासी विहंगमणि पाल द्वारा खोजे गये इस खूबसूरत पहाड़ी स्थल का इतिहास पहली सदी का है. कुल्लू में भरपूर प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है, कहीं भी चले जाइए आपको निराश नहीं होना पड़ेगा फिर भी रोरिक कला दीर्घा, ऊरुसवती हिमालय लोक कला संग्रहालय और शाम्बला बौद्ध थंगका कला संग्रहालय देखने योग्य हैं.

बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग का हॉटस्पॉट है मनाली:

मनाली कुल्लू जिले में ही स्थित घाटी का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल होने के साथ ही भारत का प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल भी है. कुल्‍लू से उत्तर दिशा में केवल 40 किलो मीटर की दूरी पर लेह की ओर जाने वाले राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर घाटी के सिरे के पास मनाली स्थित है. लाहौल और स्‍पीति, बारा भंगल (कांगड़ा) और जनस्‍कर पर्वत श्रृंखला पर चढ़ाई करने वालों के लिए यह एक मनपसंद स्‍थान है. मंदिरों से अनोखी चीजों तक, यहां से मनोरम दृश्‍य और रोमांचकारी गतिविधियां मनाली को हर मौसम और सभी प्रकार के यात्रियों के बीच लोकप्रिय बनाती हैं.

ब्रिटिश राज की धीमी गूंज है डलहौज़ी :

डलहौज़ी एक पहाड़ी स्टेशन है जो औपनिवेशिक आकर्षण से भरा हुआ है, जिसमें ब्रिटिश राज की धीमी गूंज हैं. पांच पहाड़ियों (कैथलॉग पोट्रेस, तेहरा , बकरोटा औरबोलुन) से बाहर फैले शहर का नाम 19वीं शताब्दी के ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौज़ी के नाम पर रखा गया है. शहर की अलग-अलग ऊंचाई इसे विभिन्न प्रकार के वनस्पतियों के साथ छायांकित करती है जिसमें चीड़, देवदार, ओक्स और फूलदार रोडोडेंड्रॉन के सुंदर ग्रूव शामिल होते हैं.

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औपनिवेशिक वास्तुकला में धनी, शहर कुछ सुंदर चर्चों को संरक्षित करता है. इसके अद्भुत वन ट्रेल्स जंगली पहाड़ियों, झरने, स्प्रिंग्स और रिव्यूलेट्स के विस्टा को नजरअंदाज करते हैं. पहाड़ों से बाहर निकलने के लिए एक चांदी के सांप की तरह, रावी नदी के घुमाव और मोड़ कई सुविधाजनक बिंदुओं से देखने के लिए उपहार है. चंबा घाटी और महान धौलाधर पर्वत पूरे क्षितिज में बर्फ से ढके हुए चोटियों के शानदार दृश्य भी.

छोटे ल्‍हासा के नाम से प्रसिद्ध है धर्मशाला:

धर्मशाला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जहां पाइन के ऊंचे पेड़, चाय के बागान और इमारती लकड़ी पैदा करने वाले बड़े वृक्ष ऊंचाई, शांति तथा पवित्रता के साथ यहां खड़े दिखाई देते हैं. वर्ष 1960 से, जब से दलाई लामा ने अपना अस्‍थायी मुख्‍यालय यहां बनाया, धर्मशाला की अंतरराष्‍ट्रीय ख्‍याति भारत के छोटे ल्‍हासा के रूप में बढ़ गई है.

पर्वतों की गोद मे बसा धर्मशाला जिसके एक और धौलाधार की पहाड़ियां हैं, तो दूसरी और शिवालिक पर्वतमाला, धर्मशाला तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा के निवास स्थान के साथ साथ निर्वासित तिब्बत सरकार का मुख्यालय भी है. धर्मशाला खूबसूरत हरे-भरे देवदार के वृक्षों से गिरा हुआ है, यहां धौलादार की पहाड़ियां जो हर समय बर्फ की चादर ओढ़े रहती है, इसका खूबसूरत नज़ारा यहां से देखा जा सकता है, साथ ही चंबा की पहाड़ियों को भी यहां से देखा जा सकता है. धर्मशाला के मैक्लोडगंज मे तिब्बत के लोग निवास करते हैं इसलिए इसे छोटा ल्हासा के नाम से भी जाना जाता है. यहां के बाज़ारों मे तिब्बती कलात्मक वस्तुएं बेची जाती है, यहां पर कई तरह की तिब्बती रेस्तरां भी हैं, जहां परम्परागत तिब्बती खाना मिलता है, धर्मशाला की पहाड़ियों पर ट्रैकिंग भी किया जाता है.

झीलों का शहर है कुफरी :

कुफरी, 2743 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, शिमला से लगभग 13 किमी की दूरी पर एक छोटा सा शहर है. इस जगह का नाम ‘कुफ्र’ ब्द से पड़ा है, जिसका स्थानीय भाषा में मतलब है ‘झील’. इस जगह के साथ जुड़े आकर्षण के कारण यहां वर्ष भर पर्यटक आते हैं. महासू पीक, ग्रेट हिमालयन नेचर पार्क, और फागू कुफरी में कुछ प्रमुख पर्यटन स्थलों में से हैं. बर्फ से ढकी चोटियां, गहरी घाटियां और मीठे पानी के झरने, कुफरी में यह सब है. कुफरी में ठण्‍ड के मौसम में अनेक खेलों का आयोजन किया जाता है जैसे स्‍काइंग और टोबोगेनिंग के साथ चढ़ाडयों पर चढ़ना. ठण्‍ड के मौसम में हर वर्ष खेल कार्निवाल आयोजित किए जाते हैं और यह उन पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण है जो केवल इन्‍हें देखने के लिए यहां आते हैं. यह स्‍थान ट्रेकिंग और पहाड़ी पर चढ़ने के लिए भी जाना जाता है, जो रोमांचकारी खेल प्रेमियों का आदर्श स्‍थान है.

मठों की भूमि है केलांग 

हिमालय का यह ख़ूबसूरत शहर केलांग “मठों की भूमि” के नाम से प्रसिद्ध है. यहां कई पर्यटक स्थल हैं और यह लाहौल और स्पीति जिले का मुख्यालय है. केलांग की प्रशंसा में जाने माने लेखक रुडयाड किप्लिंग ने यह कहा कि “यहाँ भगवन वास करते हैं, इंसानों के लिए यहां कोई स्थान नहीं.” ऊँची ऊँची पहाड़ियां और वादियों पर छाई हरियाली मन को आनंदित करती हैं.

सभी फोटो साभार: हिमाचल सरकार की वेबसाइट www.himachal.nic.in