नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है, और यहां रहने वाले मुस्लिम और ईसाई भी उन्हीं हिंदू पूर्वजों के वंशज हैं, इसलिए देश में कोई ‘अहिंदू’ नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदू होना मतलब भारत माता का पुत्र होना है, और हर हिंदू को यह समझना चाहिए कि उसकी पहचान के साथ देश के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।
भागवत बेंगलुरु में आयोजित एक विशेष लेक्चर सीरीज़ को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि प्राचीन यात्रियों ने इस भूमि पर रहने वाले लोगों को “हिंदू” कहा था। उन्होंने हिंदू समाज को चार वर्गों में विभाजित करते हुए बताया—
“पहला वर्ग वह है जो गर्व से कहता है कि वह हिंदू है। दूसरा वर्ग मानता तो है कि वह हिंदू है लेकिन उसे इस पर गर्व नहीं है। तीसरा वर्ग ऐसा है जो खुद को भीतर से हिंदू मानता है लेकिन सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करता। चौथा वर्ग वह है जो भूल चुका है कि वह हिंदू है।”
भारत एक हिंदू राष्ट्र है
उन्होंने दोहराया कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है और मुसलमान व ईसाई भी उसी पूर्वज परंपरा से आए हैं। भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू होना मतलब राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार होना है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट होकर संगठित शक्ति बनना होगा। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वासी और मजबूत हिंदू समाज को ‘वसुधैव कुटुंबकम् (विश्व एक परिवार है)’ के संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचाना चाहिए। साथ ही उन्होंने नैतिकता और करुणा पर आधारित भारतीय जीवन मॉडल तैयार करने का आह्वान किया, जिससे दुनिया प्रेरणा ले सके।
यह कार्यक्रम RSS की 100 वर्ष की यात्रा के तहत आयोजित किया गया था, जिसमें दक्षिण भारत से लगभग 1200 विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया गया था।
मोहन भागवत ने इस दौरान संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को भी याद किया। उन्होंने कहा कि हेडगेवार ने स्कूली दिनों में ही ब्रिटिश अधिकारियों का स्वागत “वंदे मातरम्” के नारों से किया था। भागवत ने कहा कि दुनिया में कोई दूसरा स्वैच्छिक संगठन नहीं है जिसने इतना निरंतर विरोध सहते हुए भी स्वयंसेवकों के समर्पण और त्याग से इतनी मजबूती हासिल की हो। उन्होंने कहा कि RSS अपने स्वयंसेवकों से ही अपनी शक्ति बनाता है, किसी बाहरी समर्थन पर निर्भर नहीं रहता।
