नई दिल्ली. ग्रामीण विकास मंत्रालय महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि ग्रामीण परिवारों को इस योजना का पूरा लाभ मिल सके। देशभर के 2.69 लाख ग्राम पंचायतों में फैली इस योजना के तहत 26 करोड़ से अधिक पंजीकृत मजदूर हैं।
जॉब कार्ड की जारी प्रक्रिया: कानून में स्पष्ट प्रावधान
एमजीएनरेगा एक्ट के शेड्यूल-II के पैरा 2 के अनुसार, ग्राम पंचायत को आवेदन मिलने के 15 दिनों के भीतर जॉब कार्ड जारी करना अनिवार्य है, जिसमें यूनिक जॉब कार्ड नंबर, पंजीकरण संख्या, बीमा पॉलिसी नंबर और उपलब्ध होने पर आधार नंबर शामिल होना चाहिए। पैरा 3 में यह भी कहा गया है कि जॉब कार्ड का नवीनीकरण हर पाँच साल में अनिवार्य है। ये सभी प्रक्रियाएं—जॉब कार्ड जारी करना, सत्यापन और नवीनीकरण—राज्य सरकारों और ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी हैं।
e-KYC से सत्यापन और नवीनीकरण होगा आसान
मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे जॉब कार्ड सत्यापन और नवीनीकरण के लिए NMMS ऐप (National Mobile Monitoring System) में उपलब्ध e-KYC फीचर का उपयोग करें। अब तक 99.67% एक्टिव मजदूरों के आधार सीड हो चुके हैं, जिससे e-KYC प्रक्रिया और सरल हो गई है।
कैसे काम करता है e-KYC?
ग्राम रोजगार सहायकों/वर्कसाइट सुपरवाइज़र/मेट द्वारा NMMS ऐप के माध्यम से मजदूर की फोटो ली जाती है। यह फोटो रीयल टाइम में आधार डेटा से मैच की जाती है। पूरा प्रोसेस एक मिनट से भी कम समय में पूरा हो जाता है। राज्यों को नेटवर्क और अन्य तकनीकी समस्याओं को दुरुस्त करते हुए प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। e-KYC वर्कसाइट, ग्राम पंचायत कैंप या किसी भी तय स्थान पर किया जा सकता है।
अब तक 56% एक्टिव मजदूरों की e-KYC पूरी हो चुकी है।
गलत डिलीशन रोकने के लिए SOP लागू
जॉब कार्ड/वर्कर डिलीट करने की प्रक्रिया को लेकर मंत्रालय ने 24 जनवरी 2025 को विस्तृत SOP जारी की थी।
इस SOP में:
स्पष्ट और पारदर्शी दिशानिर्देश,
मनमानी/गलत डिलीशन रोकने के पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान शामिल किए गए हैं। राज्यों का दायित्व है कि वे SOP का कड़ाई से पालन करें, जबकि मंत्रालय इस पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखता है।
मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध
मंत्रालय ने पुनः स्पष्ट किया है कि हर इच्छुक ग्रामीण परिवार को एमजीएनरेगा के तहत उसके अधिकार सुरक्षित रूप से मिलते रहें, इसके लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
