मजदूरों को नहीं मिल पा रही सहायता सामाग्री

धर्मपुर (मंडी). हिमाचल प्रदेश राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड शिमला में मंडी जिला के 21 हजार से अधिक पंजीकृत मनरेगा और अन्य निर्माण मजदूरों के लाभ स्वीकृत नहीं हो रहे हैं. जिनमें धर्मपुर विकास खंड के तीन हजार से अधिक मजदूरों के लाभ भी शामिल हैं.

ज़िला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश में बनी भाजपा सरकार पिछले सात महीनों में राज्य श्रमिक बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पाई है. जिससे बोर्ड कोई निर्णय नहीं कर पा रहा है. जिस कारण मजदूरों को मिलने वाली वाशिंग मशीनें, सोलर लैम्प, साइकलें, इंडक्शन हीटर, छात्रवृति, विवाह और चिकित्सा सहायता मिलना बंद हो गई है. जबकि धर्मपुर में पिछली सरकार के समय में गठित बोर्ड की ओर से दो हजार से अधिक मजदूरों की सहायता सामग्री को वितरित करने में मंत्री राजनीति कर रहे हैं. जो सहायता मार्च में बंटनी थी उसे अभी तक भी बंटने नहीं दे रहे हैं.

जिसके कारण डरवाड़ पंचायत  के सौ से अधिक मजदूरों की सामग्री और सहायता अभी तक नहीं बंटी है. जबकि जिस सरकार में वह सबसे वरिष्ठ मंत्री हैं. वह सरकार बोर्ड का अध्यक्ष लगाने में ही नाकाम रही है. धर्मपुर खंड के तीन हज़ार और मजदूरों के लाभ स्वीकृत नहीं हो रहे हैं.

बोर्ड का चेयरमैन न लगने से सरकार की मजदूर विरोधी सोच साफ दिखती है. जिस कारण पिछले सात महीनों से मजदूरों की सहायता सामग्री और राशी मिलना बंद हो गई है. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि हिमाचल किसान सभा और मनरेगा मजदूर यूनियन सरकार की इस मजदूर विरोधी नीति और सरकार की असफलता तथा सामग्री वितरण में मंत्री की दखलदांजी और तानाशाही के खिलाफ आज 17 जुलाई से गांवों में जनजागरण अभियान चलायेगी और 10 अगस्त को धर्मपुर में विशाल रैली और प्रदर्शन करेगी. इसके अलावा हिमाचल किसान सभा और  मनरेगा मजदूर यूनियन मजदूरों को अन्य दिहाड़ीदार मजदूरों के बराबर 225 रु मजदूरी देने की भी मांग करेगी. पैमाइश के बहाने मजदूरी में कटौती करने के नियम को समाप्त करने की भी सरकार से मांग करेगी.

भूपेंद्र सिंह ने लोक अदालत ने गोहर में मनरेगा कामगार यूनियन की याचिका पर दिए गए निर्णय का भी स्वागत किया. जिसमें मनरेगा मजदूरों को निर्धारित 184 रु दिहाड़ी देने के आदेश जारी किए गए हैं. इस निर्णय के बारे में भी मनरेगा मजदूरों को जागरूक किया जाएगा ताकि भविष्य में विभाग मजदूरी में कटौती ना कर पाए.