Attari-Wagah Border : 23 अप्रैल को गलती से भारत-पाकिस्तान सीमा पार करने के बाद पाकिस्तान रेंजर्स द्वारा हिरासत में लिए गए BSF Constable Purnam Kumar Shaw को बुधवार सुबह भारत को लौटा दिया गया। Border Security Force (BSF) ने अपने आधिकारिक बयान में जवान की सुरक्षित वापसी की पुष्टि की है।
कैसे हुई सीमा पार और गिरफ्तारी?
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के निवासी पूर्णम शॉ, 10 अप्रैल से पंजाब की India-Pakistan International Border पर एक तदर्थ BSF टीम में ड्यूटी पर थे। 23 अप्रैल को, फिरोजपुर जिले के पास बॉर्डर के Zero Line क्षेत्र में कुछ border area farmers की मदद करते समय वे अनजाने में Pakistani territory में प्रवेश कर गए। उसी वक्त पाकिस्तान रेंजर्स ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
BSF की कोशिशें और फ्लैग मीटिंग्स
घटना के बाद BSF और Pakistani Rangers के बीच flag meetings और communication channels के माध्यम से संपर्क स्थापित किया गया। हालांकि शुरुआत में cross-border firing की घटनाओं की वजह से बातचीत में व्यवधान आया था, लेकिन BSF ने diplomatic engagement के जरिए जवान की वापसी के लिए लगातार प्रयास जारी रखे।
अटारी-वाघा बॉर्डर पर हुआ हैंडओवर
14 मई की सुबह सुबह 10:30 बजे कांस्टेबल पूर्णम कुमार शॉ को Attari-Wagah Border पर पाकिस्तान से भारत को सौंप दिया गया। यह रिहाई नियमित फ्लैग मीटिंग्स और द्विपक्षीय संवाद की सफलता है।
परिवार को मिली राहत
शॉ के पिता भोला नाथ शॉ, जो एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी हैं, ने बताया कि उन्हें मंगलवार रात अधिकारियों द्वारा सूचना मिली थी कि उनके बेटे को रिहा किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि official written confirmation अब तक नहीं मिला था।
क्यों है यह घटना महत्वपूर्ण?
इस घटना ने एक बार फिर सीमा की संवेदनशीलता और Indian soldiers on duty की चुनौतियों को उजागर किया है। यह सुरक्षा बलों के लिए एक चेतावनी भी है कि border areas में ground movement कितना जोखिम भरा हो सकता है।
