बुद्धि कुजुर खूंटी की एक महिला जिसने समाज को दिखाया आइना

बुद्धि कुजुर खूंटी की एक महिला जिसने समाज को दिखाया आइना - Panchayat Times

खूंटी. जिले के तारो सिलादोन की ये है बुद्धि कुजुर. बुद्धि कुजूर अपने दृढ़ निश्चय के बल पर आज अपने गांव में एक मिसाल बन गई है और मिसाल भी ऐसी कि बैंक जाने की बजाय गांव के जरूरतमन्द अब बुद्धि कुजूर से ही आर्थिक सहायता मांगने पहुंचते हैं. वैसे तो बुद्धि कुजूर आंगनबाड़ी सेविका है लेकिन एक घटना ने बुद्धि कुजूर को अंदर से झकझोर कर रख दिया और उसी दिन एक बड़ी लकीर खींचने का संकल्प लिया.

कुली कबाड़ी का करते थे काम 

आज से कुछ साल पहले बुद्धि कुजूर और उसके पति जो कुली कबाड़ी का काम करते थे परिवार की आर्थिक स्थिति दयनीय थी. पति भी पत्नी बुद्धि को हर दिन प्रताड़ित करता था. बाद में ससुर का देहांत हो गया. किसी तरह घर का गुजर-बसर करते थे जब बुद्धि कुजुर दूसरी बार गर्भवती थी और बच्चा जनने के लिए अस्पताल में सर्जरी के लिये देने को पैसे नहीं थे तो बुद्धि कुजूर के पति ने खेत बंधन देकर पैसे जुटाए, इतने में भी पैसे सर्जरी के लिए कम पड़ गए तो दो पेड़ बेच दिए ताकि पेड़ बेचने के पैसे से पत्नी का इलाज कराया जा सके.

मदद के लिए सब हट गए थे पीछे

लेकिन पेड़ खरीदने वाले व्यापारी ने उनके साथ बेईमानी कर उनके दो से ज्यादा पेड़ काट डाले. तब ऐसे में गांव वाले पंचायत बैठे और पंचायत में बुद्धि कुजूर के परिवार को गांव से अलग-थलग किया गया, सामाजिक सांस्कृतिक रूप से गांव वालों ने बहिष्कार कर दिया. गर्भवती बुद्धि कुजूर की मदद के लिए सब पीछे हट गए. बुद्धि कुजूर अस्पताल में भर्ती थी तब एक व्यक्ति आकर उसकी आर्थिक मदद की और अस्पताल में सर्जरी से बेटे को जन्म दिया और तीन माह तक मायके में रही.

बुद्धि कुजुर ने दृढ़ निश्चय किया कि जिस पेड़ को काटने की बदौलत गांव की गांवसभा ने उन्हें गांव से बहिष्कृत किया अब वही कमजोरी बुद्धि की ताकत बन गयी और चार पेड़ की जगह 100 से ज्यादा पेड़ लगा डाला. बुद्धि कुजुर ने अपने घर के चारों तरफ वृक्षारोपण किया साथ ही एक गैर सरकारी संस्था प्रदान के सहयोग से बिरसा मुंडा आम बागवानी के तहत 114 आम के पौधे बंजर भूमि पर लगाया और बाकी बचे बंजर जमीन पर गेंदा फूल भी उगाया. अब इसके बाद धीरे धीरे बुद्धि कुजूर की आर्थिक स्थिति संवरने लगी और अब बुद्धि कुजूर के पास 40 – 50 हजार रुपये हर समय होते हैं.

 पेड़ काटने के जुर्म में गांव से कर दिए थे अलग-थलग 

अब वही गांव के लोग जो कल तक बुद्धि कुजूर को पेड़ काटने के जुर्म में गांव से अलग-थलग कर दिए थे. गांव के सामाजिक सांस्कृतिक दस्तूरों में बहिष्कार किया था आज वही गांव के लोग अपनी जरूरत के समय बुद्धि कुजूर के पास हाथ पसारते हैं और बुद्धि कुजूर उन्हें बगैर अपशब्द कहे बेझिझक उदार मन से पैसे देती हैं जब भी गांव के किसी को जरूरत होती है तो वे बैंक ना जाकर बुद्धि कुजूर के पास जाते हैं और बुद्धि कुजूर उन्हें सहर्ष पैसे देकर मदद करते हैं. गांव के लोग अब जरूरत के वक्त अपने खेतों को बंधक के तौर पर बुद्धि के पास देते हैं और इतना हीने के बाद भी बुद्धि गांव के खेतों को बगैर बंधक लिए पैसे देती हैं.

बुद्धि कुजुर गांव ही नहीं पूरे खूंटी में महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बन गई और अब वह पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहती. अब गांव के बेरोजगार और अन्य लोग भी बुद्धि के नक्शे कदम चलने लगे हैं और वृक्षारोपण और खेती को अपनाकर आर्थिक स्थिति बेहतर बनाना चाहते हैं.