बोकारो में चल रहा है मिलावटी पेट्रोल का कालाधंधा

सावधान! बोकारो में मिलावटी पेट्रोल का गोरखधंधा
फाइल फोटो

बोकारो. बोकारो में इन दिनों पेट्रोल-डीजल के टैंकर में डिटर्जेन्ट और किरोसिन तेल मिलाने का धंधा चल जोरों पर चल रहा है. सूत्रों के अनुसार जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र में इन दिनों यह धंधा जोर-शोर से चल रहा है. धंधेबाजों की सेटिंग ऐसी है कि पेट्रोल-डीजल भरे टैंकर पेट्रोल पंप पहुंचने से पहले रास्ते में ही कहीं स्थान विशेष पर पहुंच जाते हैं. वहां मिलावट के बाद उसे पंप तक पहुंचाया जाता है. टैंकर के चालक, खलासी और संभवत: पंप मालिकों के साथ-साथ जाहिर है कि इतने बड़े गोरखधंधे में पुलिस की संलिप्तता भी हो सकती है. सूत्रों के अनुसार बोकारो के बालीडीह स्थित एचपीसीएल के डिपो (स्टॉक यार्ड) से चलने वाले टैंकरों के साथ छेड़छाड़ का धंधा पिंड्राजोरा के इलाके में चल रहा है. अन्य कंपनियों के टैंकरों के साथ ऐसा ही भी घालमेल होता रहा है.

ऐसे करते हैं मिलावट

डिपो से पेट्रोल पंप तक टैंकर लाने के दौरान चालक और खलासी, धंधेबाजों के साथ उनके लिये डीजल-पेट्रोल की चोरी कराते हैं. तेल कंपनियों के डिपो में की गई सील ढ़क्कन पर ही लगी रहती है और ढक्कन उठाकर पाइप से डीजल-पेट्रोल निकालते हैं. सूत्र बताते हैं कि ढ़क्कन पर भले ही ताला लगा होता है, लेकिन उसके रड में तकनीकी खराबी होती है, जिसका नाजायज फायदा पेट्रोल-डीजल चोर उठा रहे हैं. ढक्कन पर ताला तो लगा ही रहता है, लेकिन ढक्कन उठ जाता है. उसमें पाइप लगाकर डीजल-पेट्रोल निकाल लिया जाता है.

जीपीएस के बाद भी धोखाधड़ी

सूत्रों का कहना है कि मिलावटखोरी की शिकायतें देश के कई हिस्सों में मिलने के बाद चालक खलासी पर नकेल कसने के लिए पेट्रोलियम कम्पनियों ने अपने टैंकर वाले वाहनों में जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) लगवा दिए, लेकिन चंद रुपयों की खातिर ईमान बेच देने वाले टैंकरों के ड्राइवर इसके बाद भी धोखाधड़ी करते हैं. डिपो से पंप तक के निर्धारित रूट से भटककर वे वही रास्ता पकड़ लेते हैं, जहां मिलावट का धंधा चलता है. जब कंपनी वाले इसे लेकर सवाल करते हैं तो वे नजदीकी रोड रूट होने या भीड़-भीड़ से बचने या जाम में से कोई बहाना बना डालते हैं.

सरकार और उपभोक्ता, दोनों को नुकसान

पेट्रोल और डीजल में मिट्टी के तेल की मिलावट अपराधियों के लिए एक बहुत फायदे का धंधा है. इसका नुकसान एक ओर सरकार को होता है, क्योंकि मिट्टी के तेल पर वह जो भारी भरकम सब्सिडी देती है, उसका यह दुरुपयोग है. नुकसान उपभोक्ता को होता है, क्योंकि वह मिट्टी के तेल पर सब्सिडी की खातिर पेट्रोल और डीजल की भारी कीमत सहता है. सूत्रों के मुताबिक मिलावट की वजह साफ है, जहां पेट्रोल और डीजल की कीमत अधिकतम लगभग 70 रुपए प्रति लीटर तक है, वहीं मिट्टी का तेल लगभग 30-40 रुपए लीटर के आसपास बिकता है. ऊपर से अगर पीडीएस का किरोसिन हो तो इस दर से कहीं और ज्यादा सस्ता पड़ता है. यह फर्क अपराधियों का दुस्साहस बढ़ा देता है. सरकार यह मानती है कि मिट्टी का तेल गरीबों का ईंधन है, इसलिए इस पर भारी सब्सिडी जरूरी है, लेकिन मिलावटखोर उसका दुरुपयोग करते हैं. साथ ही मिलावटी पेट्रोल वाहन को नुकसान पहुंचाता है और उसका प्रदूषण पूरे समाज के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है.

केमिकल डाल बदल देते हैं स्वरूप

सूत्रों के अनुसार पेट्रोल-डीजल के टैंकरों में या पेट्रोल पम्प पर धंधेबाज ऐसे केमिकल डाल देते हैं, जिससे कि मिट्टी तेल की मिलावट की संभावना तक को पकड़ना मुश्किल हो जाता है. सूत्रों की मानें तो सियालदह से एक खास तरह का एसेन्स किरोसिन मिलावटी पेट्रोल-डीजल में मिला दिया जाता है. दावा है कि इस एसेन्स के डालने के बाद उसमें पेट्रोल-डीजल के घनत्व की मापी तक में कोई फर्क नहीं पड़ता. सूत्रों के अनुसार टाटानगर का एक कारोबारी बोकारो में इस गिरोह का मुख्य धंधेबाज है.वही इसके पूर्व बालीडीह में भी धंधा चलाया करता था.

जल्द खराब हो जाती हैं गाड़ियां

मिलावटी ईंधन मासूम जनता महंगे दर पर अपने वाहनों में भरवाती है. इसलिए अब लोगों के वाहन साल दो साल मेंं ही धुएं के काले-काले छल्ले छोड़ने लगते हैं. लगभग हर वाहनों की यही कहानी है. इंजन खराब होकर आवाज करने लगे हैं, तेज रफ्तार पकड़ते ही इंजन भी तेज गति से लंबा धुआं सड़कों पर छोड़ते हैं. वाहन विशेषज्ञ बताते हैं कि फ्यूल इंजेक्शन पंप के सहारे गाड़ियां चलती हैं. मिलावटी डीजल के कारण पंप, नोजल और फिल्टर जल्दी खराब होते . डीजल गाड़ियों में इसकी शिकायत इन दिनों ज्यादा रही हैं. मिलावट के कारण नोजल जाम होता है और इसका असर इंजन पर पड़ता है, क्रैंक भी टूटते हैं. जिस वाहन की मरम्मत एक लाख किलोमीटर चलने के बाद होनी चाहिए, उसे 50 हजार किलोमीटर में मरम्मत की जरूरत पड़ जाती है.

सेहत के लिए भी खतरनाक

वाहनों में मिलावटी फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन पर असर तो पड़ता ही है, इससे वातावरण दूषित होता है तो उसका सीधा असर हमारी सेहत पर भी पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसके कारण फेफड़ा संबंधी रोग बढ़ते हैं. वाहनों से निकलने वाला धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. कई मरीज तो इसी वजह से सीजनेबल अस्थमा के भी शिकार हो जाते हैं। इसको लेकर सावधानी बेहद जरूरी है.

जांच कर करेंगे कार्रवाई : एसपी

बोकारो जिले में पेट्रोल-डीजल में मिलावट के धंधे के बारे में पूछे जाने पर एसपी कार्तिक एस. ने कहा कि इसकी जानकारी मिलने के साथ ही वह अपने स्तर से कार्रवाई करेंगे। इसकी जांच कराकर ठोस कार्रवाई की जायेगी