सीबीआई निदेशक ने लगाई शिमला के अफसरों की क्लास

सीबीआई निदेशक ने लगाई शिमला के अफसरों की क्लास-Panchayat Times
प्रतीक चित्र

शिमला. देश की सर्वोच्च एजेंसी (सीबीआई ) नोर्थ जोन के संयुक्त निदेशक ने सीबीआई शिमला के अफसरों की क्लास लगाई. सीबीआई के नोर्थ जोन के सयूक्त निदेशक विनीत विनायक ने शिमला सीबीआई अफसरों को यह लताड़ शिमला सीबीआई थाना में दर्ज हाई प्रोफाइल केसो की जांच लंबा खिचने को लेकर लगाई है.

संयुक्त निदेशक ने सीबीआई में दर्ज हाई प्रोफाइल केसो की जांच को जल्द पूरा करने के कड़े फरमान भी जारी किए हैं. सीबीआई नोर्थ जोन के संयुक्त निदेशक विनीत विनायक शिमला सीबीआई कार्यलय में इंस्पेक्शन के लिए पहुंचे और इस दौरान समीक्षा बैठक भी आयोजित कर दी. सीबीआई में दर्ज लंबित केसो की लंबी सूची देखकर वह हैरत में पड़ गए.

अफसर तबादला के लिए तैयार रहना

सीबीआई में दर्ज अधिकतर हाई प्रोफाइल केस की जांच या तो लंबित पड़ी हुई है या फिर ऐसे पुराना पेचीदा केसो की जांच ही बंद कर दी गई है. संयुक्त निदेशक ने अफसरों और जांच अधिकारियों को दो टुक कहा कि समय रहते हाई प्रोफाइल केसो की जांच को पूरा करो वरना सुस्त जांच अफसर तबादला के लिए तैयार रहना. सीबीआई के नोर्थ जोन के सयूक्त निदेशक विनीत विनायक समीक्षा बैठक करने के बाद दिल्ली रवाना हो गए है.

नोर्थ जोन का आलाधिकारी

यहा बता दें कि देश की सर्वोच्च एजेंसी (सीबीआई ) का नोर्थ जोन का आलाधिकारी हर दो साल बाद अपने जोन के अधीन आने वाले सीबीआई कार्यलय या थाना में जाकर केसो की समीक्षा करता है. नोर्थ जोन के संयुक्त निदेशक विनीत विनायक इस बार शिमला पहुंचे और यहा पर लंबित मामलो के केसो को लेकर समीक्षा बैठक करने के साथ ही जांच दायरे में चल रहे केसो की प्रोग्रेस को देखा. सीबीआई शिमला में अधिकतर केसो की काफी लंबे समय से जांच चल रही है.

ये ऐसे हाई प्रोफाइल केस है जिनकी जांच न तो बंद हो पाई है और न ही सीबीआई की जांच किसी नतीजे पर पहुंच पाई है. कुछ वर्षो पुराने ऐसे ही मामले है जिनकी जांच अधर में लटकी हुई है तो कुछ ऐसे भी केस है जिनकी जांच बंद कर दी गई है. सीबीआई के अनसुलझे केसो की फेहसियत भी लंबी होती जा रही है. कोटखाई गुड़िया प्रकरण मामले की जांच भी अभी चल ही रही है.

उल्लेखनीय है कि साल 1998 में अज्ञात अपराधी शिमला के बड़े कारोबारी हर्ष बालजीज को गोली मार कर फरार हो गए थे. कारोबारी को शिमला शहर में ही मौत के घाट उतारा गया था. साल 2003 में इस हाईप्रोफाइल मामले को सीबीआई को सौंपा गया था. लेकिन सीबीआई इस मामले से पर्दा नहीं उठा पाई है.

”जनमंच कार्यक्रमों के माध्यम से निपटाई गईं इतनी शिकायतें”

डॉक्टर की आत्महत्या का मामला

आईजीएमसी में एक प्रशिक्षु डॉक्टर की आत्महत्या का मामला भी सीबीआई के लिए पहेली बन कर रह गया है. यह मामला साल 1995 का था. डॉक्टर के परिजनों ने हत्या का संदेह जताया था. बाद में यह मामला भी सीबीआई को सौंपा गया, मगर सीबीआई इसका खुलासा नहीं कर पाई.

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस स्टडी) से ऐतिहासिक घंटा चोरी मामले में सीबीआई के हाथ अब तक खाली हैं. एडवांस्ड स्टडी शिमला से 21 अप्रैल 2010 की रात को ऐतिहासिक घंटा चोरी हुआ था. इस बेशकीमती घंटे का वजन 30 किलो था और यह घंटा वर्ष 1903 में नेपाल नरेश रद्य सिंह बहादुर ने तत्कालीन वायस सराय को उपहार में दिया था. घंटा संस्थान के मुख्य द्वार पर लगाया गया था. लेकिन सात साल पहले रात के समय चह चोरी हो गया था.

शिमला पुलिस ने इस मामले की प्रारंभिक तफतीश की थी. साल 2015 में हाईकोर्ट ने मामला सीबीआई के सुपूर्द कर दिया था. लेकिन सीबीआई इसे नहीं सुलझाई पाई.