छात्रवृति घोटाला : बढ़ाया गया जांच का दायरा, सीबीआई ने कब्जे में लिया 40 संस्थानों का रिकार्ड

छात्रवृति घोटाला : बढ़ाया गया जांच का दायरा, सीबीआई ने कब्जे में लिया 40 संस्थानों का रिकार्ड - Panchayat Times

शिमला. राज्य में हुए 265 करोड़ के छात्रवृति घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है. अब तक 22 निजी शिक्षण संस्थानो की जांच कर रही सीबीआई ने जांच का दायरा अब 40 संस्थानो तक बढ़ा दिया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार देश की सर्वोच्च जांच एजैंसी ने अब छात्रवृति घोटाले में 40 संस्थानों का रिकार्ड कब्जे में ले लिया है. सीबीआई जांच की जद में अब हिमाचल के साथ-साथ बाहरी राज्यों से जुड़े संस्थान भी आ गए है.

आंबटन को लेकर विभाग निजि संस्थानों पर ज्यादा मेहरबान

छात्रवृति घोटाले की जांच में बड़े पैमाने पर घोटाले से संबधित कई तथ्य सामने आए है. सीबीआई कि छानबीन में पाया जा रहा है कि छात्रवृति आंबटन को लेकर विभाग निजि संस्थानों पर ज्यादा मेहरबान रहा. कुछ एक निजि संस्थान को ही करोड़ो की छात्रवृतिया दे दी गई ,जबकि कुछ संस्थानो को एक भी छात्रवृति नही दी गई.

जिन बैंक खातों का उल्लेख किया था, उनके स्थान पर दूसरे बैंक खातों में जमा की गई छात्रवृति

सीबीआई जांच में निजी संस्थानों के कर्ताधर्ताओं, शिक्षा विभाग और राष्ट्रीयकृत बैंकों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत भी सामने आई है. ऐसे में कई चेहरे जांच दायरे में चल रहे है. छात्रों की छात्रवृति हड़पने के लिए विभिन्न स्तरों पर अनियमिताएं बरती गई. छात्रों द्वारा आवेदन पत्रों में जिन बैंक खातों का उल्लेख किया था, उनके स्थान पर दूसरे बैंक खातों में छात्रवृति जमा की गई.

सीबीआई की नजर में बैंक, संस्थान और शिक्षा विभाग के भी अधिकारी

सूत्रों की मानें तो सीबीआई की जांच में जल्द ही अब बैंक, संस्थान और शिक्षा विभाग के अधिकारी नप सकते है. सीबीआई छानबीन में मिले तथ्य के आधार पर जिला ऊना से जुड़े संस्थान के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर चुकी है. इस मामले में जल्द ही कुछ गिर तारियां भी हो सकती है. चूकिं छात्रवृति घोटाले में कमीशन का खेल चलता था. निजि शिक्षण संस्थान छात्रों की छात्रवृतियां हड़पने को लेकर कमीशन देते थे.

चार तात्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी की मांग

सीबीआई जांच में पाए गए साक्ष्यों के आधार पर शिक्षा विभाग से जुड़े चार तात्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी भी मांगी जा चुकी है. घोटाले में कई चेहरो की संलिप्ता सीधे तौर पर उभर कर सामने आई है. आधार नंबर व मोबाइल नंबर के साथ ही छात्रों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करोड़ो रुपए की छात्रवृति हड़पने के आरोप कई संस्थानों पर लगे है.