नई दिल्ली. भारत की जनगणना 2027 (Census 2027) की तैयारियां तेज हो गई हैं। फेज-1 (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस) के प्री-टेस्ट के सफल समापन के बाद सरकार ने अप्रैल 2026 से देशव्यापी प्रक्रिया शुरू करने का रोडमैप तय कर लिया है। रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने इसे भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना की दिशा में अहम कदम बताया है। अप्रैल–सितंबर 2026: फेज-1, फरवरी 2027: फेज-2 जनगणना दो चरणों में होगी।
फेज-1 (Houselisting & Housing Census): अप्रैल से सितंबर 2026
फेज-2 (Population Enumeration): फरवरी 2027
हालांकि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में जनसंख्या गणना सितंबर 2026 में होगी।
लाखों फील्ड स्टाफ, मोबाइल ऐप से डेटा कलेक्शन
सरकार के मुताबिक, उप-जिला, जिला और राज्य स्तर पर बैठकों में लाखों फील्ड कर्मियों की तैनाती, मोबाइल ऐप आधारित डेटा संग्रह, और डिजिटल सुरक्षा फीचर्स पर विस्तृत चर्चा हुई है। फेज-1 के लिए बहु-स्तरीय तैनाती से प्रक्रिया को सुचारू बनाया जाएगा।
स्टेकहोल्डर फीडबैक से तय हुई अगली रणनीति
प्री-टेस्ट से मिले फीडबैक की समीक्षा सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के जनगणना निदेशकों की मौजूदगी में की गई। 16 दिसंबर को हुई बैठक में ट्रेनिंग और फील्ड-लेवल सटीकता पर जोर दिया गया ताकि डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
₹11,718 करोड़ की लागत, जाति गणना भी शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर को ₹11,718.24 करोड़ की लागत से जनगणना 2027 को मंजूरी दी। पहले से तय निर्णय के अनुसार, जाति गणना भी इस बार जनगणना का हिस्सा होगी। यह स्वतंत्रता के बाद आठवीं और कुल 16वीं जनगणना है।
30 लाख कर्मी, 1.02 करोड़ मानव-दिवस रोजगार
इस महाअभियान में करीब 30 लाख फील्ड वर्कर्स जुड़ेंगे और 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। स्थानीय स्तर पर 18,600 तकनीकी कर्मी लगभग 550 दिन तक डिजिटल सपोर्ट और मॉनिटरिंग करेंगे। अधिकांश गणनाकर्मी सरकारी स्कूल शिक्षक होंगे।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग, जल्दी मिलेंगे नतीजे
डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप, और निगरानी के लिए सेंट्रल पोर्टल का उपयोग होगा। Census Management and Monitoring System (CMMS) पूरे प्रोसेस की देखरेख करेगा।
Census-as-a-Service मॉडल से मंत्रालयों को मशीन-रीडेबल डेटा
HLB Creator वेब-मैप से डिजिटल हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक
Self-Enumeration का विकल्प भी उपलब्ध
सरकार का लक्ष्य है कि गांव और वार्ड स्तर तक डेटा तेजी से और यूज़र-फ्रेंडली तरीके से उपलब्ध कराया जाए, ताकि नीति-निर्माण के लिए जरूरी सूचनाएं “एक क्लिक” पर मिल सकें।
