इंटरनेट दुरुपयोग की जांच के लिए जनवरी के अतं तक बनेंगे नियम

इंटरनेट दुरुपयोग की जांच के लिए जनवरी के अतं तक बनेंगे नियम-Panchayat Times

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में बताया कि वह इंटरनेट के दुरुपयोग की जांच के लिए जनवरी के अंत तक नियमों के एक नए पारुप को अंतिम रूप देगा, जिसमें “लोकतांत्रिक राजनीति के लिए अकल्पनीय व्यवधान” पैदा करने की क्षमता है.

शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में, केंद्र ने कहा कि वह इंटरनेट मध्यस्थों, कंपनियों, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, खोज इंजनों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को दिशा निर्देशों के लिए लगातार प्रयास  कर रहा था. जो इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग की सुविधा प्रदान करते हैं.

इससे पहले 6 अक्टूबर को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने एक प्रमुख दैनिक के 100 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में कहा था, कि मीडिया फेक न्यूज को रोकने के लिए रचनात्मक समाधान तैयार करे. नायडू ने कहा, “हम एक ऐसे युग में रह रहे हैं, जब सोशल मीडिया तेजी से बढ़ रहा है, जिसका बाइ-प्रोडक्ट फेक न्यूज है. फेक न्यूज की समस्या मीडिया की विश्वसनीयता को अब नष्ट कर रही है.”

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि “व्यक्तिगत अधिकार और देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा” को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने महसूस किया कि बढ़ते खतरों के मद्देनजर बिचौलियों के प्रभावी विनियमन के लिए नियमों को संशोधित किया जाना चाहिए. इंटरनेट के दुरुपयोग के कारण होने वाली गड़बड़ियों को लेकर मंत्रालय ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, सोशल मीडिया के उपयोग में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई है. “कम इंटरनेट टैरिफ के साथ, स्मार्ट उपकरणों की उपलब्धता और अंतिम वय्कति तक पहुँच से भारत में अधिक से अधिक लोग इंटरनेट/सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का हिस्सा बन रहे हैं.” जिसके चलते केंद्र सरकार ने इन नियमों को लागू करने का निर्णय लिया गया है.

पंचायत टाइम्स और आईजीपीपी ने पिछले दिनों ‘चुनाव, मीडिया और फेक न्यूज’ के विषय पर एक सर्वे किया है और चुनाव में फेक-न्यूज अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान में पंचायत टाइम्स झारखंड में फैले अपने रिपोर्टरों के माध्यम से जनता में फेक न्यूज के प्रति जागरूकता बढ़ायेगा. इसके साथ ही चुनाव के दौरान फेक-न्यूज के प्रसार को रोकने में मदद करेगा.