10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाने को मिली मंजूरी, जानिए क्या है ये संगठन और कैसे करते है काम

10,000 नए किसान उत्पादक संगठन बनाने को मिली मंजूरी, जानिए क्या है ये संगठन और कैसे करते है काम - Panchayat Times

नई दिल्ली. केन्द्र सरकार ने देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अगले पांच साल में 4,496 करोड़ रुपये की लागत से 10,000 नए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने की योजना को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने बीते बुधवार को इस योजना के गठन को मंजूरी दी है.

क्या है किसान उत्पादक संगठन

किसान उत्पादक संगठन, असल में यह किसानों का एक समूह होता है, जो वास्तव में कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और कृषि व्यावसायिक गतिविधियां चलाने में एक जैसी धारणा रखते हों, एक गांव या फिर कई गांवों के किसान मिलकर भी यह समूह बना सकते हैं. यह समूह बनाकर कंपनी अधिनियम के तहत एक किसान उत्पादक कंपनी के तौर पर पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं.

किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से जहां किसान को अपनी पैदावार के सही दाम मिलते हैं, वहीं खरीदार को भी उचित कीमत पर वस्तु मिलती है. वहीं यदि अकेला उत्पादक अपनी पैदावार बेचने जाता है, तो उसका मुनाफा बिचौलियों को मिलता है. एफपीओ सिस्टम में किसान को उसके उत्पाद के भाव अच्छे मिलते हैं, उत्पाद की बर्बादी कम होती है, अलग-अलग लोगों के अनुभवों का फायदा मिलता है.

क्यों उठाया गया कदम

सरकार के अनुसार यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति वैसी नहीं होती है कि वे सक्षमता से उत्पादन प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल, सेवा व बाजार समेत मूल्यवर्धन का लाभ उठा सकें, लेकिन एफपीओ के जरिए यह सब आसान हो जाएगा.

एफपीओ के गठन और बढ़ावा देने के लिए तीन एजेंसियां

इस योजना के तहत प्रत्येक एफपीओ के गठन से लेकर पांच साल तक के लिए उसके संचालन पर 2024-25 से लेकर 2027-28 की अवधि के दौरान 2,369 करोड़ रुपये देनदारी की व्यवस्था की गई है. शुरुआत में एफपीओ के गठन और बढ़ावा देने के लिए तीन एजेंसियां होंगी, जिनमें लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) शामिल हैं.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि 10,000 नए एफपीओ 2019-20 से लेकर 2023-24 के दौरान बनाने का लक्ष्य रखा गया है तोमर ने कहा, एफपीओ बनने से किसानों की सामूहिक शक्ति बढ़ेगी जिससे उनके लिए गुणवत्तापूर्ण कृषि, प्रौद्योगिकी (Technology) व कर्ज प्राप्त करना आसान होगा तथा बाजार में उनकी पहुंच सुगम हो जाएगी और इससे उनकी आय में इजाफा होगा.

सूचना प्रबंधन व निगरानी के जरिए पूरी परियोजना के मार्गदर्शन, डाटा संग्रहण और अनुरक्षण के लिए लघु कृषक कृषि व्यापार संघ के पास एक राष्ट्रीय परियोजना प्रबंधन एजेंसी होगी. सरकार ने एक बयान में कहा कि शुरुआत में मैदानी इलाके में एक एफपीओ में न्यूनतम 300 सदस्य होंगे जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में इसके सदस्यों की न्यूनतम संख्या 100 होगी.