नई दिल्ली: एनसीईआरटी की कक्षा 8 की विवादित सामाजिक विज्ञान की किताब को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में केंद्र सरकार ने शुक्रवार, 20 मार्च 2026, को अदालत को बताया कि लीगल स्टडीज कोर्स और न्यायपालिका से जुड़े कंटेंट को अंतिम रूप देने के लिए डोमेन एक्सपर्ट्स का एक पैनल बनाया गया है। इस पैनल में वरिष्ठ वकील और पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा, पूर्व न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस और नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के निदेशक शामिल हैं। यह जानकारी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को दी।
इससे पहले एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की किताब के उस अध्याय को लेकर बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी थी, जिसमें न्यायपालिका पर आपत्तिजनक सामग्री होने का आरोप लगा था। एनसीईआरटी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ‘Exploring Society: India and Beyond’ नामक पुस्तक का संबंधित भाग वापस ले लिया गया है और वह अब उपलब्ध नहीं है।
एनसीईआरटी ने एक सख्त एडवाइजरी भी जारी की थी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद एनसीईआरटी ने एक सख्त एडवाइजरी भी जारी की थी। इसमें कहा गया कि जिस किसी के पास यह प्रतिबंधित कक्षा 8 की पुस्तक हो, वह उसे एनसीईआरटी मुख्यालय लौटाए। साथ ही, सोशल मीडिया या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अध्याय ‘Role of Judiciary in our Society’ से जुड़ी सामग्री पोस्ट की गई हो तो उसे जल्द से जल्द हटाया जाए।
मामला तब बढ़ा जब सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्याय पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने 26 फरवरी के अपने आदेश में किताब के आगे प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने यह भी कहा था कि किसी वैकल्पिक शीर्षक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उसी सामग्री का प्रसार उसके आदेश की अवहेलना माना जाएगा।
क्या था पूरा विवाद?
एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब में न्यायपालिका के सामने भ्रष्टाचार, मुकदमों का भारी लंबित बोझ और पर्याप्त संख्या में जजों की कमी जैसी चुनौतियों का जिक्र किया गया था। इसी अध्याय की भाषा और प्रस्तुति पर सवाल उठे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। बाद में एनसीईआरटी ने कहा कि किताब को उचित प्राधिकरणों से परामर्श के बाद दोबारा लिखा जाएगा।
