जानिए क्या है 127वां संविधान संशोधन विधेयक और इससे राज्य एंव केंद्र में ओबीसी वर्ग को कितना होगा फायदा

जानिए क्या है 127वां संविधान संशोधन विधेयक और इससे राज्य एंव केंद्र में ओबीसी वर्ग को कितना होगा फायदा - Panchayat Times
A file photo in which Haryana's Jat community demands reservation for them in OBC list

नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने ओबीसी वर्ग को फायदा देने के लिए एक नया विधेयक 127वां संविधान संशोधन विधेयक लाई है. इसके तहत राज्यों को ओबीसी की सूची बनाने की शक्ति देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 342-ए और 366(26) सी में संशोधन होना है.

सोमवार यानि 9 अगस्त को केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉक्टर वीरेंद्र कुमार ने लोकसभा में संविधान (127वां संशोधन) विधेयक, 2021 पेश किया, जिसके बाद सर्वसम्मति से बिल पास हो गया. विपक्षी पार्टियों ने भी इस विधेयक का समर्थन किया है.  इस संशोधन की मांग कई क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ सत्ताधारी पार्टी के ओबीसी नेताओं ने भी की है.

राज्यसभा में भी इस विधेयक के आसानी से पारित होने के आसार

राज्यसभा में भी इस विधेयक के आसानी से पारित होने के आसार है, क्योंकि सभी विपक्षी दल इस विधेयक पर एक साथ है. इस विधेयक के जरिए महाराष्ट्र में मराठा समुदाय से लेकर हरियाणा के जाट समुदाय को ओबीसी में शामिल करने और उन्हें आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद विधेयक पेश

ज्ञात हो कि मई में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि केवल केंद्र को ये अधिकार है कि वह ओबीसी समुदाय से जुड़ी लिस्ट तैयार कर सके. हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा इसपर आपत्ति जाहिर की गई थी, इसी के बाद अब केंद्र सरकार संविधान संशोधन बिल लाकर इसे कानूनी रूप देना चाहती है.

आखिर क्यों पड़ी संविधन संशोधन की जरूरत?

अब तक ओबीसी की अलग-अलग सूचियां केंद्र और राज्य सरकारें तैयार करती रही हैं. अनुच्छेद 15(4), 15(5) और 16(4) ने राज्यों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान कर उनकी सूची बनाने और उन्हें घोषित करने के लिये स्पष्ट रूप से शक्ति प्रदान की है.

हालांकि, यह सूची एक समान नहीं है. अभी राज्यों की ओबीसी सूची में कई ऐसी कई जातियां शामिल हैं, जो केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल नहीं हैं. राज्यों की सूची के आधार पर ही ओबीसी के दायरे में आने वाली जातियों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता रहता. आगे कई जातियां इसके दायरे में लाई जातीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से ऐसा करने पर रोक लग गई थी. 

क्या था 5 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2021 के अपने एक फैसले में राज्यों के ओबीसी सूची तैयार करने पर रोक लगा दी थी. शीर्ष अदालत ने कहा था कि केवल केंद्र सरकार को ही ओबीसी की सूची तैयार करने का अधिकार होगा. 

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने महाराष्ट्र के मराठा वर्ग को आरक्षण देने वाला कोटा सर्वसम्मति से रद्द कर दिया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मराठा आरक्षण से सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई 50 फीसदी की आरक्षण सीमा का साफ तौर पर उल्लंघन हो रहा है.

दरअसल, महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को 2018 में तत्कालीन देवेंद्र फडणवीस सरकार ने आरक्षण दिया था. जिसको 5 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने गलत ठहराते हुए इसे रद्द कर दिया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर आपत्ति जताई थी.

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट कर राज्यों को दोबारा यह अधिकार देने के ही लिए ही 127वां संविधान संशोधन विधेयक लाया गया. खतरा यह था कि यदि राज्यों की सूची खत्म कर दी जाती तो तकरीबन 671 ओबीसी समुदायों के लोग शैक्षणिक संस्थानों और नियुक्तियों में आरक्षण से वंचित हो जाते. 

क्या खास है इस विधेयक में?

विधेयक में यह व्यवस्था की गई है कि राज्यों की ओर से बनाई गई ओबीसी श्रेणी की सूची उसी रूप में रहेगी जैसा यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले थी. राज्य सूची को पूरी तरह से राष्ट्रपति के दायरे से बाहर कर दिया जाएगा. इस सूची को राज्य विधानसभा अधिसूचित कर सकेगी.

इससे पहले क्या था?

2018 में पास हुए 102वें संविधान संशोधन अधिनियम में अनुच्छेद 342 के बाद भारतीय संविधान में दो नए अनुच्छेदों 338बी और 342ए को जोड़ा गया था. 

338बी राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के कर्तव्यों और शक्तियों से संबंधित है. वहीं, 342ए राष्ट्रपति को विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को अधिसूचित करने का अधिकार प्रदान करता है. इन वर्गों को अधिसूचित करने के लिए वह संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श कर सकता है.

क्या बदलेगा?

संसद में संविधान के अनुच्छेद 342-ए और 366(26) सी के संशोधन पर अगर मुहर लग जाती है तो इसके बाद राज्यों के पास ओबीसी सूची में अपनी मर्जी से जातियों को अधिसूचित करने का अधिकार होगा. इससे ओबोसी जातियों के आरक्षण का रास्ता साफ होगा. 

किन राज्यो पर होगा असर?

127वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित होने से महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात और कर्नाटक की राजनीति पर पर बड़े और दूरगामी असर पड़ने की आसार है. इससे लंबे समय से आरक्षण की मांग कर रहे जातियों को ओबीसी वर्ग में शामिल होने का मौका मिल सकता है.

राजनीति क्या है?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस संविधान संशोधन विधेयक के जरिए ओबीसी को साधने की कोशिश है. यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है कि ओबीसी को लेकर सरकार का यह दूसरा बड़ा कदम माना जाएगा.

अगर यह विधेयक पास होता है तो इसका फायदा भाजपा को महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और हरियाणा विधानसभा चुनाव समेत 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में मिल सकता है.