हिमाचल: चंबा की 12 पंचायतों के 158 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोई जाने वाली मक्की की पारंपरिक किस्मों को भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिलने की उम्मीद, चैन्नई भेजा गया प्रस्ताव

हिमाचल: चंबा की 12 पंचायतों के 158 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोई जाने वाली मक्की की पारंपरिक किस्मों को भौगोलिक संकेत (GI Tag) मिलने की उम्मीद, चैन्नई भेजा गया प्रस्ताव - Panchayat Times
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शिमला. प्रदेश के चंबा जिले में स्यूल नदी के दोनों किनारों पर फैली सलूणी घाटी को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल्द एक नई पहचान मिलने वाली है.

यहां की मक्की की पारंपरिक किस्मों की खेती के जरिए आज के इस दौर में भी उनका संरक्षण करने वाले किसानों के संघ ‘सलूणी सफेद मक्का संगठन’ को अब स्वाद और गुणवत्ता से भरपूर मक्की की पारंपरिक किस्मों को भौगोलिक संकेत(Geographical Indication Tag) पंजीकरण मिलने की उम्मीद है.

प्रस्ताव भेजा गया है : डीसी

चंबा के डीसी बताते हैं, “सलूणी सफेद मक्का संगठन से मक्की की इन पारंपरिक किस्मों की ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्रेशन के लिए प्रस्ताव मिला था. प्रस्ताव को सभी अध्ययनों और तथ्यों के साथ हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के पेटेंट इनफॉरमेशन सेंटर को प्रेषित किया था.

उन्होंने आगे बताया कि अब इस मामले को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन पंजीकरण के लिए चेन्नई स्थित रजिस्ट्रार के कार्यालय को भेज दिया गया है, हमें पूरी उम्मीद है कि आने वाले कुछ ही समय में सलूणी घाटी में किसानों द्वारा पीढ़ियों से उगाई जा रही मक्की की पारंपरिक किस्मों को जीआई टैग मिलेगा. इनमें हच्छी कुकड़ी (सफेद मक्की), रत्ती और चिटकु मक्की शामिल है.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलेगी विशेष पहचान

जमाने से ये किसान फसल दर फसल बीजों को सहेज कर अगली बुवाई के लिए संरक्षित रखते आ रहे हैं. भौगोलिक सूचक पंजीकरण प्राप्त होने से मक्की की इन किस्मों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान मिलने वाली है.”

क्यों फेमस है चंबा

हिमाचल प्रदेश के कुछ उत्पादों को पहले ही जीआई टैग मिल चुका है, जिनमें चंबा रुमाल भी शामिल है. कुल्लू शॉल, कांगड़ा चाय, किन्नौरी शॉल, कांगड़ा पेंटिंग, चूली तेल और काला जीरा भी भौगोलिक संकेत पंजीकरण प्राप्त उत्पाद हैं.

सलूणी क्षेत्र की जिन पंचायतों में मक्की की इन पारंपरिक किस्मों को उगाया जा रहा है, उनमें भांदल, सनूंह, किहार, डांड, पिछला डियूर, कंधवारा, भड़ेला, खड़जौता, हिमगिरी, पंजेई, किलोड़ और सूरी पंचायतें शामिल हैं.

चम्बा जिले की सीमांत भांदल पंचायत भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण द्वारा 10 लाख की राशि का पादप जीनोम संरक्षक सामुदायिक पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है. इससे पूर्व भारत सरकार द्वारा पौधा किस्म रजिस्ट्री के तहत इन्हें रजिस्ट्रीकरण प्रमाण पत्र दिया गया था.

12 पंचायतों में होती है बुआई

मक्की की इन किस्मों को 12 पंचायतों के 158 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोया जाता है. विशेष तौर से सफेद मक्की प्रोटीन से भरपूर मानी जाती है. इस किस्म में क्रूड फाइबर नामक तत्व भी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र के लिए तो मुफीद है. इसके अलावा डायबिटीज को भी नियंत्रित करने में सहायक है.

क्या होता है भौगोलिक संकेत का अर्थ (GI) टैग (Geographical Indication-GI Tag)

एक भौगोलिक संकेत (GI) एक ऐसा नाम या प्रतीक होता है जिसे कृषि, प्राकृतिक, मशीनरी और मिठाई आदि से संबंधित उत्पादों के लिए किसी क्षेत्र विशेष (देश, प्रदेश या टाउन) के किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या संगठन को दिया जाता है.

एक भौगोलिक संकेत (जीआई) एक संकेत है जो उन उत्पादों पर उपयोग किया जाता है जिनकी एक विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति होती है और इसमें उस क्षेत्र की विशेषताओं के गुण और प्रतिष्ठा भी पायीं जाती हैं.