राजस्थान के ‘छोटी बेरी’ गांव को जन्नत कहना बेहतर होगा

जिला है नागौर और इसका छोटा सा गांव है छोटी बेरी - Panchayat Times

जयपुर. राजस्थान सच में बेहद रंगीला है. ये रंग सिर्फ संस्कृति या वेषभूषा का ही नहीं बल्कि कई आश्चर्यों के लिए भी है. प्रदेश का एक जिला है नागौर और इसका छोटा सा गांव है छोटी बेरी, जिसकी चर्चा बहुत होती है. कारण इतने हैं कि सबको बता पाना भी मुमकिन नहीं है. गांव के बारे में तो कुछ लोग यहां तक कहते हैं कि इसे गांव नहीं, जन्नत कहना ज्यादा बेहतर रहेगा. छोटी बेरी गांव राजस्थान के सबसे अमीर गांवों में से एक है. यहां के 95 प्रतिशत लोग शिक्षित हैं. सबके पास पक्के मकान हैं और दूर-दूर तक एक भी पान मसाले या शराब की दुकान नहीं.

आदर्श गांव किसे कहते हैं ये देखना है तो आपको नागौर जिले के डीडवाना तहसील के छोटी बेरी गांव पधारना होगा. ये महज कागजों में ही निर्मल और आदर्श गांव नहीं है बल्कि हकीकत में भी यहां उपलब्धियों और अच्छाइयों का अंबार लगा हुआ है. भाभा परमाणु संस्थान में कार्यरत वैज्ञानिक खान मोहम्मद खान इसी गांव के हैं. नागौर जिले की पहली सबसे बड़ी क्रिकेट प्रतियोगिता को छोटी बेरी ने ही जीता. जिसमें जिले की 188 टीमों ने भाग लिया था. बताया तो ये भी गया है कि इस गांव के 130 से ज्यादा ग्रोसरी स्टोर्स अरब देशों में हैं. साफ-सफाई के साथ ही नालियों और सड़कों की व्यवस्था भी बेहतरीन है.

हर दूसरे घर से परिवार का सदस्य सरकारी नौकरी में

छोटी बेरी देश में सबसे ज्यादा कामयखानी लोग रहते हैं. इसलिए इसे कायमखानियों का गांव भी कहते हैं. ये और बात है कि लगभग 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में सभी समाज और धर्म के लोग रहते हैं. गांव में घुसते ही आलीशान पक्के मकान और खूबसूरत इमारतों के बाहर खड़ी बड़ी-बड़ी गाड़ियां गांववालों की अमीरी की कहानी खूद ही बयां कर देती हैं. अगर पढ़ाई की बात करें तो औसतन गांव के हर दूसरे घर से परिवार का सदस्य सरकारी नौकरी में है. चिकित्सा, सेना, न्यायिक सेवा, पुलिस, आबकारी विभाग, अध्यापक, प्रशासनिक अधिकारी समेत हर सरकारी सेवा में गांव के लोग मिल जाएंगे.

हर दूसरे घर से परिवार का सदस्य सरकारी नौकरी में

तीन घोड़ो की सवारी में महारत हासिल

गांव के ही फतेह मोहम्मद खान जो कि हनुमानगढ़ के जिला आबकारी अधिकारी के पद पर कार्यरत है अपनी कर्मठता और बेहतरीन सेवा के लिए जाने जाते हैं. वहीं, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से रिटायर्ड होने वाले लियाकत अली की ईमानदारी के चर्चे गांव के साथ ही सूबे के पुलिस महकमे में आज भी कायम है. 61वीं केवलरी में अबरार को एक साथ तीन घोड़ो की सवारी में महारत हासिल है. उन्हें घुड़सवारी में दर्जनों मेडल मिल चुके हैं. गांव के बच्चे-बच्चे की जुबां पे उसका नाम सुना जा सकता है.

पहली मुस्लिम महिला आईपीएस असलम खान

इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में देश का प्रतिनिधित्व करने हाल में लेबनान गए थे इसी गांव के निशार खान. मुस्लिम बाहुल्यता के बावजूद भी महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को लेकर भी गांव ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं. राजस्थान की पहली मुस्लिम महिला आईपीएस असलम खान भी इसी गांव से हैं.

हर दूसरे घर से परिवार का सदस्य सरकारी नौकरी में

देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने को बेताब

हर रंग है इस गांव में. जानकर हैरानी हो सकती है कि वर्तमान में करीब 200 से ज्यादा लोग भारतीय सेना में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं और लगभग 500 से ज्यादा लोग देश सेवा से रिटायर्ड हो चुके हैं. 50 से ज्यादा सरकारी अध्यापक इस गांव से हैं. इस गांव के लोग आजादि से पहले भी देश के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने को बेताब रहते थे. स्वतंत्रता सेनानी रहे मुकारब खान जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ आजाद हिंद फोज में थे वो इसी गांव से थे, देश को आजाद कराने का जज्बा ऐसा कि उनके आठ भाईयों में से सात फौज में रहे.

सांप्रदायिक सौहार्द के लिए मिसाल

ये गांव सांप्रदायिक सौहार्द के लिए पूरे देश में मिसाल कायम करता है. मुस्लिम आबादी की बाहुल्यता के साथ ही हिन्दुओं की मेघवाल, जाट, नाई, वाल्मीकी, सुनार और कुम्हार जैसी जातियों के लोग यहां रहते हैं पर कभी भी सांप्रदायिक तनाव नहीं हुआ. सबसे खास बात ये है कि गांव में एक भी शराब, बीड़ी-सिगरेट और गुटखे की दुकान नहीं दिखती है. कुरितियों से लड़ने का ग्रामीणों का ऐसा है कि ना गांव के लोग मृत्यु भोज करते हैं और ना ही शादियों में डीजे बजाकर पैसे लुटाए जाते हैं. हर क्षेत्र के साथ ही पत्रकारिता में गांव से दो पत्रकार पूरे जिले में अपनी पहचान रखते हैं.

हर दूसरे घर से परिवार का सदस्य सरकारी नौकरी में
प्रतीक चित्र

महिलाएं संभाल रही गांव

जानकर हैरानी होगी कि छोटी बेरी की सरंपच रेशमा बानो एमए और बीएड पास हैं और यहां की पंचायत समित सदस्य मेहरुनिशां भी बीए पास हैं. गांव की उपसरपंच भी महिला ही हैं. लगता है गांव की पूरी बागडोर महिलाओं के ही हाथ में है.