नई दिल्ली. भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अब एक नया नियम लागू होने जा रहा है, जिसके तहत वरिष्ठ अधिवक्ताओं को कोर्ट नंबर 1 में किसी भी मामले का मौखिक उल्लेख यानी दोषी ठहराने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह फैसला खुद देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बी.आर. गवई ने रविवार को कहा।
Singhvi के उठते ही मिला संकेत, CJI ने कहा – “नोटिस निकाल दो”
यह पूरी घटना उस समय घटी जब Senior Advocate Abhishek Manu Singhvi अदालत में एक मामले का मौखिक उल्लेख करने के लिए खड़े हुए। इससे पहले कि वे पूरी बात कह पाते, CJI गवई ने उन्हें टोकते हुए कहा किअब समय है कि Junior Advocates को भी अवसर मिले। इसके बाद उन्होंने court master को निर्देश दिया कि इस संबंध में official notice जारी कर दिया जाए।
Monday से लागू होगा नया नियम
CJI गवई ने स्पष्ट किया कि यह नियम सोमवार, 11 अगस्त 2025 से लागू होगा। उन्होंने कहा कि Senior lawyers द्वारा mention करने को लेकर बहुत demand है कि इसे बंद किया जाए। अब से कोई भी designated senior lawyer oral mention नहीं कर पाएगा।
Singhvi ने जताई सहमति, लेकिन रखी एक शर्त
CJI की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए Singhvi ने कहा कि मैं पूरी तरह तैयार हूं, बशर्ते यह नियम समान रूप से सभी पर लागू किया जाए।
इस पर जवाब देते हुए CJI ने स्पष्ट किया कि यह नियम Court No.1 तक ही सीमित रहेगा, क्योंकि वे अन्य बेंचों के लिए नियम तय नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कम से कम मेरी अदालत में अब यह अनुमति नहीं होगी। जूनियर वकीलों को मौका मिलना चाहिए।
क्यों अहम है यह बदलाव?
Supreme Court की कार्यप्रणाली में यह बदलाव Legal Practice Reforms की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि senior advocates को मामले की त्वरित सुनवाई के लिए मौखिक रूप से उल्लेख करने का विशेषाधिकार मिल जाता है, जिससे junior lawyers को अवसर नहीं मिल पाते। इस नई व्यवस्था से legal representation में समानता और young advocates को आगे आने का अवसर मिल सकता है।
