मनरेगा से किए जाने वाले कार्यों में हुई गड़बड़ी, सीएम हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान

मनरेगा से किए जाने वाले कार्यों में हुई गड़बड़ी,सीएम हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

धनबाद. भाजपा सरकार के कार्यकाल में धनबाद जिले में मनरेगा से किए जाने वाले विकास कार्यों में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी की गई. लेकिन वर्तमान सरकार एक्शन मोड़ में है और इसका सीधा फायदा आम जनता को मिल रहा है.


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्रवाई और गरम तेवर की वजह से गोविंदपुर प्रखंड के जमडीहा पंचायत में व्यापक पैमाने पर अनियमितता का खुलासा हुआ है. जिले के गोविंदपुर प्रखंड में अवस्थित जमडिहा पंचायत का कुबड़ीटांड़ गांव यहां मनरेगा से किए गए विकाश के कार्यों में जमकर धांधली हुई है. वर्ष 2018-19 में मनरेगा के माध्यम से गांव में मुर्गी सेड,बकरी सेड और कूप आदि के निर्माण के लिये लाभुकों का चयन किया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि मुखिया पति सह ठेकेदार,एवं रोजगार सेवक की साठ-गांठ के बदौलत लगभग ढ़ाई दर्जन से अधिक लाभुकों के नाम पर कुछ पूरे कुछ आधे अधूरे तो कुछ कागजों पर हीं बकरी एवं मुर्गी सेड बना दिए गए एवं कूप की खुदाई भी दिखा दी गई. लेकिन लाभुकों को पता नहीं चला कि उनके नाम पर कोई योजना पास हुई है.

मामले का खुलासा तब हुआ जब गांव के एक युवक सूरज प्रकाश ने मनरेगा की वेबसाइट खंगाली तो उसने पाया कि गांव में विकास के नाम पर कई लोगों के साथ छल किया गया है. उसमें एक लाभुक वह स्वंय था. उसके पिता के नाम पर 63 हजार की लागत से सेड निर्माण कार्य पूर्ण दिखाया गया था और अंतिम चरण के बिल की निकासी से संबंधित दस्तावेज अपलोड किए जा चुके थें. तब उसने गांव वालों के इसकी सूचना दी एवं स्थानीय मुखिया एवं रोजगार सेवक से बात की. लेकिन मुखिया और रोजगार सेवक के साथ-साथ मुखिया पति उसे बरगलाते रहें. तब उसने पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ट्वीट किया.

डीसी को जांच कर उचित कार्रवाई का आदेश दिया

मुख्यमंत्री ने उसके ट्वीट के बाद संज्ञान लेते हुए धनबाद डीसी को जांच कर उचित कार्रवाई का आदेश दिया. जिसके बाद डीआरडीए निदेशक संजय कुमार भगत गांव में निरीक्षण के लिए पहुंचे और उन्होंने व्यापक जांच के बाद अनियमितता को स्वीकारते हुए मौजूद पदाधिकारियों को जल्द से जल्द कार्यों को पूरा करने का निर्देश दिया, न सिर्फ सूरज प्रकाश बल्कि उसी गांव के नुनुलाल महतो का बकरी सेड, देवेन महतो की नलकूप समेत कई अन्य ग्रामीणों के साथ भी इसी तरह की फर्जीवाड़ा की गई और उनके योजनाओं को बगैर उनकी जानकारी का कागजों पर ही पूरा कर दिया गया और उसका फाइनल भुगतान के लिए फाइल आगे बढ़ा दिया गया. पूरे मामले पर जब स्थानीय मुखिया पति से बात की गई तो दोनो अक्के बक्के रह गयें और खुद को बेगुनाह एवं पाकसाफ बताने की कोशिश करते नजर आएं.

डीडीसी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि विभाग ने संज्ञान में लेते हुए उक्त गांव का दौरा किया तो पाया गया कि वहां दो अलग-अलग वित्तीय वर्षों की योजनाओं को बगैर धरातल पर उतारे उसका भुगतान करा लिया गया. ऐसे में घोर अनियमितता उजागर हुई है. इसके लिए गोविंदपुर बीडीओ को संबंधित दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आदेश जारी किया गया है. साथ हीं उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा की जॉब कार्ड मामले मे बड़े पैमाने पर अनियमितता उजागर हुई है और यह कार्य बैंक के मिली भगत के बगैर सम्भव नहीं है. सभी दोषियों पर कार्यवाई होगी.