नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार में जारी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लेते हुए राज्यों के लिए कमर्शियल LPG (Liquefied Petroleum Gas) की सप्लाई को युद्ध-पूर्व स्तर के 70 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इससे पहले यह आवंटन 50 प्रतिशत था, जिसे अब 20 प्रतिशत अतिरिक्त बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने इस अतिरिक्त आपूर्ति को ऑटोमोबाइल, स्टील, टेक्सटाइल, डाई, केमिकल और प्लास्टिक जैसे अहम उद्योगों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजा गया पत्र
इस संबंध में तेल सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि अतिरिक्त कमर्शियल LPG सप्लाई का इस्तेमाल विशेष रूप से लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज यानी अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए किया जाए, ताकि उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर कम से कम पड़े।
50% से बढ़ाकर 70% किया गया आवंटन
नीरज मित्तल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मौजूदा 50 प्रतिशत आवंटन के अलावा अब 20 प्रतिशत अतिरिक्त कमर्शियल LPG देने का प्रस्ताव लागू किया गया है। इसके बाद Packed Non-Domestic LPG का कुल आवंटन अब प्री-क्राइसिस लेवल के 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती
इसी बीच केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती का भी ऐलान किया है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी गई है।
सरकार ने कहा है कि यह कदम ग्लोबल ऑयल शॉक से आम जनता और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को बचाने के लिए उठाया गया है।
पश्चिम एशिया संकट का भारत पर असर
दरअसल, ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। भारत अपनी करीब 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। ऐसे में ईरान की ओर से Hormuz Strait बंद करने की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है।
हालांकि, फिलहाल भारतीय जहाजों को ईरान की ओर से इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है, लेकिन वैश्विक सप्लाई लाइन को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।
सरकार ने जनता को राहत देने को दी प्राथमिकता
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ सीधे जनता पर डाला जाए, या फिर सरकार खुद राजस्व पर असर झेलकर लोगों को राहत दे।
उन्होंने कहा कि सरकार ने भारतीय नागरिकों को वैश्विक कीमतों की मार से बचाने के लिए यह फैसला लिया है। साथ ही, सरकार ने यह भी माना कि इस कदम से टैक्स रेवेन्यू पर बड़ा असर पड़ेगा, लेकिन मौजूदा हालात में यह जरूरी था ताकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान को कम किया जा सके।
उद्योग और आम जनता दोनों को राहत देने की कोशिश
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार के ये फैसले दोहरी राहत के रूप में देखे जा रहे हैं। एक तरफ कमर्शियल LPG सप्लाई बढ़ाकर उद्योगों को सहारा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाकर आम उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की गई है।
अगर पश्चिम एशिया में हालात लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहते हैं, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा और ईंधन को लेकर सरकार की ओर से और भी अहम कदम उठाए जा सकते हैं।
