नई दिल्ली: संसद में जारी गतिरोध के बीच कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस मंगलवार को लोकसभा महासचिव को सौंप दिया। यह नोटिस विपक्षी नेताओं के. सुरेश और मोहम्मद जावेद की ओर से दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि लोकसभा के नियम 94C (Rule 94C) के तहत दोपहर 1:14 बजे स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस जमा किया गया।
टीएमसी ने समर्थन से किया इनकार
इस बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस प्रस्ताव का समर्थन करने से फिलहाल इनकार कर दिया है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी ने कांग्रेस को पहले स्पीकर से विपक्ष की मांगों पर अपील करने और तीन दिन का समय देने का सुझाव दिया था।
उन्होंने कहा कि यदि स्पीकर विपक्ष की मांगों को स्वीकार नहीं करते, तो टीएमसी बाद में no-confidence motion का समर्थन करने को तैयार है।
अन्य विपक्षी दलों का समर्थन
सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी (SP) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सहित कई विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि टीएमसी के अलग रुख के कारण INDIA bloc में रणनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं।
राहुल गांधी को बोलने से रोकने का विवाद
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) की चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई।
राहुल गांधी ने भारत-चीन सीमा विवाद 2020 पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण (unpublished memoir) का हवाला दिया था, जिस पर स्पीकर ने आपत्ति जताई और अप्रकाशित सामग्री का उल्लेख न करने का निर्देश दिया।
संसद में लगातार हंगामा
2 फरवरी से लोकसभा में लगातार हंगामा देखने को मिल रहा है। पिछले सप्ताह आठ विपक्षी सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित भी किया गया था। सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के बावजूद विपक्ष की चार प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद यह अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम संसद की कार्यवाही, विपक्ष-सरकार संबंधों और संसदीय परंपराओं (parliamentary procedures) को लेकर चल रहे तनाव को दर्शाता है।
