विपक्ष के भारी हंगामें के बाद ध्वनि मत के जरिए राज्यसभा से भी पारित हुए किसानों से जुड़े दो बिल

विपक्ष के भारी हंगामें के बाद ध्वनि मत के जरिए राज्यसभा से भी पारित हुए किसानों से जुड़े दो बिल - Panchayat Times
Derek O Brien tearing Rajya Sabha's rule book in front of chair Panchayat Times

नई दिल्ली. लोकसभा में पारित होने के बाद कृषि से जुड़े दो विधेयक रविवार को विपक्ष के भारी हंगामें के बाद राज्यसभा से भी पारित हो गए. ध्वनि मत के जरिए हुई वोटिंग से पहले सदन में विपक्षी दलों ने भारी हंगामा किया और इन बिलों का जमकर विरोध किया.

माइक तोड़ा गया और कागज फाड़े गए

राज्यसभा में आज जब विपक्ष के सवालों का जब केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जवाब दे रहे थे तो अभूतपूर्व हंगामा हुआ. माइक तोड़ा गया और कागज फाड़े गए. मतविभाजन की मांग और सदन की कार्यवाही टालने की मांग नही मानने पर विपक्ष के सांसदों ने किया हंगामा.

प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि कोरोना महामारी के मद्देनजर विधेयक पास कराने की जल्दबाजी क्यों : देवगौड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने राज्यसभा में कहा की, ‘प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि कोरोना महामारी के मद्देनजर विधेयक पास कराने की जल्दबाजी क्यों है. उन्हें यह बताना चाहिए कि छोटे और लंबे समय में कृषक समुदाय के लिए कृषि विधेयक क्या करेंगे और इससे किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे मदद मिलेगी.’

क्या अफवाह पर ही एक मंत्री ने इस्तीफा दिया : संजय राउत

शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा ‘क्या सरकार देश को आश्वस्त कर सकती है कि कृषि सुधार विधेयकों के पारित होने के बाद, किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी और कोई भी किसान आत्महत्या नहीं करेगा? इन विधेयकों पर चर्चा करने के लिए एक विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए.’

 क्या सरकार भरोसा दे सकती है कि विधेयक पास होने के बाद किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी और आगे देश में कोई भी किसान आत्महत्या नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बताया था कि विधेयक को लेकर अफवाह फैलाई जा रही है, ऐसे में मैं पूछना चाहता हूं कि क्या अफवाह पर ही एक मंत्री ने इस्तीफा दिया.

वादे करने को लेकर आपकी विश्वसनीयता कम : डेरेक ओ ब्रायन

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कृषि विधेयकों पर कहा, ‘प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष किसानों को गुमराह कर रहा है. आपने (केंद्र) 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने को कहा है. लेकिन मौजूदा दरों पर, किसान की आय 2028 से पहले दोगुनी नहीं होगी. वादे करने को लेकर आपकी विश्वसनीयता कम है. ये सरकार सिर्फ वादे करती है. दो करोड़ नौकरियां कहां हैं.’

क्यों विरोध कर रहे हैं किसान

किसान संगठन तीन केन्द्रीय कृषि अध्यादेशों को संसद में मंजूरी के लिए पेश न करने की अपील कर रहे है. किसानों को डर है कि इन अध्यादेशों का असर मौजूदा फसल खरीद नीति पर पड़ेगा. किसानों ने आशंका जताई है कि इन अध्यादेशों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ होगा और वे बड़े कॉरपोरेट घरानों पर निर्भर हो जाएंगे.

इसलिए केंद्र सरकार को इन अध्यादेशों को वापस लेना चाहिए. भारतीय किसान यूनियन और अन्य किसान संगठनों ने केंद्र के तीन कृषि अध्यादेशों को ‘कृषक विरोधी’ करार देते हुए बीते गुरुवार को पिपली में राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया था. इसके बाद किसानों को जबरन हटाया गया.