नई दिल्ली. भारत में महंगाई मापने का पैमाना अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) को नए आधार वर्ष के साथ लागू करने की तैयारी में है। अब तक महंगाई की गणना 2012 को आधार वर्ष मानकर की जाती थी, लेकिन बीते एक दशक में लोगों की जीवनशैली और खर्च की आदतों में आए बड़े बदलावों को देखते हुए यह पैमाना अप्रासंगिक माना जाने लगा था।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने CPI का नया आधार वर्ष 2024 तय किया है। नया सूचकांक 12 फरवरी 2026 से लागू होगा और उसी दिन जनवरी 2026 की खुदरा महंगाई के आंकड़े नए ढांचे के तहत जारी किए जाएंगे।
महंगाई टोकरी होगी बड़ी, ज्यादा सटीक होंगे आंकड़े
नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में अब वस्तुओं और सेवाओं की संख्या बढ़ाकर 358 कर दी गई है, जो पहले करीब 299 थी। इससे महंगाई की गणना आम आदमी के वास्तविक खर्च के ज्यादा करीब होगी।
सरकार और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इससे न सिर्फ महंगाई की तस्वीर साफ होगी, बल्कि RBI को ब्याज दर तय करने में भी ज्यादा भरोसेमंद संकेत मिलेंगे।
E-Commerce और Online Services से जुटेगा डेटा
महंगाई मापने की प्रक्रिया भी आधुनिक होगी। अब कीमतें सिर्फ पारंपरिक बाजारों से नहीं, बल्कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल मार्केट से भी ली जाएंगी।
हवाई किराया, बिजली दरें और ऑनलाइन सेवाओं के दाम अब ज्यादा नियमित और तकनीकी तरीकों से रिकॉर्ड किए जाएंगे, जिससे डेटा की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
Netflix, OTT और Digital Subscription भी CPI का हिस्सा
नए CPI की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें डिजिटल युग के खर्च को जगह दी गई है।
अब महंगाई की गणना में शामिल होंगे—
Netflix, OTT और अन्य digital subscriptions
स्मार्टफोन, इंटरनेट सेवाएं
वायरलेस ईयरफोन, फिटनेस बैंड जैसी आधुनिक डिवाइस
यानि अब सिर्फ रोटी-सब्जी नहीं, बल्कि डिजिटल लाइफस्टाइल भी महंगाई तय करेगी।
VCR बाहर, Ola-Uber अंदर
पुराने जमाने की चीजें जैसे वीसीआर और ऑडियो कैसेट अब सूची से हटा दी गई हैं।
वहीं दूसरी ओर,
Ola-Uber जैसी app-based taxi services
ऑनलाइन शॉपिंग
अंतरराष्ट्रीय हवाई किराया
ग्रामीण इलाकों का किराया
अब पहली बार महंगाई के आंकड़ों में शामिल होंगे।
खाने-पीने का वजन घटेगा, सेवाओं का असर बढ़ेगा
एक बड़ा बदलाव खाद्य वस्तुओं के वजन को लेकर भी किया गया है। पहले CPI में खाने-पीने का हिस्सा करीब 46% था, जिसे घटाकर अब 36–37% किया जा रहा है।
इसका मकसद यह है कि सिर्फ सब्जी या अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई के आंकड़े जरूरत से ज्यादा न हिलें। अब सेवाओं और गैर-खाद्य खर्चों का असर ज्यादा दिखेगा, जिससे महंगाई की तस्वीर ज्यादा संतुलित बनेगी।
