उज्ज्वला योजना में पाई गई भारी गड़बड़ी

उज्ज्वला योजना में पाई गई भारी गड़बड़ी-Panchayat Times

चतरा. गरीबों के लिए शुरू की गई मोदी सरकार की निःशुल्क गैस वितरण की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना में चतरा जिले के इटखोरी और मयुरहंड प्रखंड में भारी गड़बड़ी हुई है. गैस की सब्सिडी का पैसा गरीबों के खाते में भेजा गया और गैस बेच दी गयी खुले बाजार में. इस पूरे गोरखधंधे में कान्हाचट्टी के इंडेन गैस वितरक गोपाल सिंह का नाम सामने आ रहा है.

आरोप के मुताबिक निःशुल्क गैस सिलेंडर के वितरण को लेकर गरीबों का केवाईसी किया गया. इसमें आश्चर्यजनक रूप से केवाईसी के बाद सभी लोगों के खाते में 24 दिसम्बर 18 को सब्सिडी की राशि तो आ गयी, लेकिन 9 महीने बीतने को हैं.

इन गरीबों को सिलेंडर के दर्शन नहीं हुए हैं. मामले का खुलासा तब हुआ जब नए गैस वितरक के पास गरीबों ने गैस सिलेंडर के लिए दावेदारी पेश कर दी. इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिला बीस सूत्री सदस्या ऋषिबाला सिंह ने सक्रिय होकर मामले में हो हल्ला किया तो आनन फानन में कुछेक गरीबों को गैस सिलेंडर दिए. पूरे तरीके से इसपर अमल नहीं किया गया. इसको खानापूर्ति कह दें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं. बीस सूत्री सदस्या ऋषिबाला सिंह की जांच आगे बढ़ी तो परत दर परत घोटाले की फेहरिस्त सामने आ गई. ऋषिबाला सिंह का आरोप है कि चतरा जिला में गैस वितरको और बिचौलिए की मदद से लगभग दस हजार गैस सिलेंडर और चूल्हा खुले बाजार में बेच दिए गए हैं.

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में फिलहाल चार हजार गैस सिलेंडर के वितरण में अनियमितता की शिकायत सामने आयी है. अगर विस्तृत रूप से जांच की गई तो गड़बड़ी के आंकड़ों के और भी बढ़ने की संभावना है. आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 29 अगस्त को सम्पन्न जिला बीस सूत्री की बैठक में बीस सूत्री सदस्य ऋषिबाला सिंह ने उज्ज्वला योजना का मामला उठाया था, बीस सूत्री की बैठक सम्पन्न हुए लगभग 15 दिनों का समय गुजर चुका है. लेकिन अभी तक न तो विभागीय मंत्री और न ही जिला प्रशासन ही गम्भीर नजर आ रहा हैं. गौरतलब बात तो यह है कि बीडीओ, प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष औऱ भाजपा नेताओं की उपस्थिति में उज्ज्वला योजना निःशुल्क गैस वितरण किया गया. फिर भी गड़बड़ी हो गयी. इसका सीधा अर्थ है कि इस गड़बड़ी में कमोवेश सभी की भूमिका थी. सभी की मिलीभगत से गरीबों के हक को मार लिया गया.

भाजपा नेता का आरोप है कि प्रखंड प्रशासन की अकर्मण्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि, जब उन्होंने 5 सितंबर 19 को गैस की कालाबजारी की बात उठायी तो 35 लोगों को आनन फानन में गैस मुहैया करवाया गया, लेकिन आश्चर्यजनक तौर से इनकी इंट्री उसी तारीख में कर दी गयी, जिस तारीख में लोगों के खाते में सब्सिडी भेजी गई थी. यानी 24 -12-18 ऋषिबाला सिंह कहती हैं कि पूरे प्रकरण में दुःखद पहलू यह है कि आदिम जनजाति बिरहोर और अतिपिछड़ा समाज भुइयां जाति को भी बिचौलियों ने नहीं छोड़ा.

ऋषिबाला का आरोप है कि गैस वितरक ने यहीं पर बस नहीं किया एक ओर तो उन्होंने सरकारी राशि का बंदरबांट किया वहीं दूसरी ओर आम लोगों से खुले बाजार में 3 से 4 हजार रुपए की वसूली की. वे कहती हैं कि इस पूरे खेल में करोड़ो की राशि के बारे न्यारे किये गए. ऋषिबाला कहती हैं कि यह विडंबना ही है कि देश और राज्य की सत्ता में हमारी सरकार काबिज है. फिर भी केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना उज्ज्वला में गैस की कालाबाजारी पार्टी की छवि को धूमिल कर रही है.