दिव्यांगों का सहारा बना जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र

कुल्लू. क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के परिसर में जिला रैडक्रॉस सोसाइटी की ओर से संचालित किया जा रहा जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र दिव्यांगों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है. यह केंद्र दिव्यांगजनों का एक मजबूत सहारा बनकर उभरा है. जिला रैडक्रॉस सोसाइटी और स्वास्थ्य विभाग के सामूहिक प्रयासों से इस केंद्र में एक ही छत के नीचे फिजियोथैरेपी के अलावा कई अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं.

अभी तक लगभग 2564 विकलांग, बुजुर्ग और अन्य लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा चुके हैं. तकरीबन 200 विकलांगों को इस केंद्र के माध्यम से आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध करवाए जा चुके हैं.

उपायुक्त एवं जिला रैडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष यूनुस ने बताया कि जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र में 1155 लोगों की फिजियोथैरेपी, 36 दिव्यांगों की स्पीच थैरेपी और 157 की ऑडियोमिट्री की गई. 114 दिव्यांगों को व्हील चेयर्स, क्रचेज और स्टिक्स इत्यादि उपलब्ध करवाई गई हैं.

दिए आवश्यक उपकरण

शुक्रवार को उपायुक्त यूनुस ने जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र की प्रबंधन समिति की त्रैमासिक बैठक की अध्यक्षता करके केंद्र में सुविधाओं के विस्तार को लेकर चर्चा की. बैठक के बाद उपायुक्त ने विकलांगता पुनर्वास केंद्र में करीब 20 दिव्यांगों को आवश्यक उपकरण वितरित किए.

इस अवसर पर सहायक आयुक्त सन्नी शर्मा, जिला रैडक्रॉस सोसाइटी के सचिव वीके मोदगिल, कार्यकारी सीएमओ डा. नरेश, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. विक्रम कटोच, जिला कार्यक्रम अधिकारी वीरेंद्र आर्य, तहसील कल्याण अधिकारी जीएल शर्मा और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे.

बैरा टैस्ट और ऑनलाइन विकलांगता प्रमाणपत्र की सुविधा आरंभ करेंगे

उपायुक्त ने बताया कि जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र में बहरेपन की पहचान के लिए अत्याधुनिक बैरा टेस्ट की मशीन भी स्थापित की जाएगी. अभी केवल इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज शिमला और मेडिकल कालेज टांडा में ही बैरा टैस्ट की सुविधा उपलब्ध है.

यूनुस ने बताया कि जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र में दिव्यांगों को ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी करने की आधुनिक सुविधा आरंभ करने की संभावना तलाशी जा रही हैं. इसके लिए केंद्रीय मंत्रालय के सॉफ्टवेयर का अध्ययन किया जा रहा है.

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