देश में पहली बार कोयला और खनिज के भंडार का पता लगाने में होगा ड्रोन इस्तेमाल

देश में पहली बार कोयला और खनिज के भंडार का पता लगाने में होगा ड्रोन इस्तेमाल-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

रांची. देश में पहली बार कोयला और खनिज के भंडार का पता लगाने में ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा. कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई सीएमपीडीआई (सेंट्रल कोल माइंस डिजाइन इंस्टीट्यूट) ने इसके लिए सात ड्रोन की खरीदारी करने जा रही है.

सर्वे मैपिंग की विशेष खासियत वाले ये ग्रेड ड्रोन जापान, अमेरिका और जर्मनी की तकनीक से लैस हैं. चेन्नई स्थित सेंटर फॉर एयरो स्पेस सेंटर में इसका निर्माण किया जा रहा है. पहले चरण में दो ड्रोन इस महीने रांची पहुंच जाएंगे. सीएमपीडीआई के जियोमैट्रिक्स विभाग के अनुसार, एक ड्रोन रांची में और दूसरा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में रहेगा. रांची के ड्रोन का उपयोग सीसीएल, बीसीसीएल की खदानों में किया जाएगा. देश में अभी खनन संबंधी कार्यों के सर्वे का काम लेजर सेंसर द्वारा कराया जाता है. ड्रोन के प्रयोग से समय की बचत होगी. खर्च भी कम होगा.

दो बड़े फायदे

झरिया की कोयला खदानों में लगी आग पर नियंत्रण पाने में मददगार साबित होगा. कोयला चोरी पर रोक प्रभावी तरीके से लगाई जा सकेगी.

ये भी जानिए
ग्रेड ड्रोन लेजर प्रणाली में लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे सर्वेक्षण कार्य करेंगे. इसमें एक्यूरेट वॉल्यूम मापने की क्षमता है. ड्रोन द्वारा फोटोग्रामेट्री प्रणाली से लिए गए फोटो से जमीन की सतह से 3डी जानकारी मिलेगी.

ड्रोन के बारे में…

डेढ़ घंटे तक आकाश में उड़ाया जा सकेगा.
1.8 करोड़ रुपए है एक ग्रेड ड्रोन की कीमत.
01 ड्रोन भेजा जाएगा बिलासपुर
400 मीटर ऊंचाई तक उड़ाया जा सकेगा.
ग्रेड ड्रोन में लेजर सेंसर, थर्मल सेंसर और ऑप्टिकल सेंसर लगे हैं. इसमें अमेरिकी राडार और लीडर सेंसर भी लगे हैं.

ड्रोन जमीन के अंदर 200 मीटर गहराई तक स्टॉक का पता लगाने में सक्षम है.