चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों में तेज हुई चुनावी सरगर्मी

चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक दलों में तेज हुई चुनावी सरगर्मी-Panchayat Times

रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव की तिथि की घोषणा के साथ ही सभी राजनीतिक दलों में चुनावी सरगर्मी तेज हो गयी है. राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी जहां एनडीए गठबंधन के तहत चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में है, वही विपक्षी दल जेएमएम के नेतृत्व में महागठबंधन के रूप में चुनाव लड़ने की कवायद में हैं.

जेवीएम और जदयू गठबंधन की चर्चा भी जोरों पर  

2019 के चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल कमोबेश 2014 की स्थिति पर  नजर बनाये हुए हैं. 2014 विधानसभा चुनाव की बात करें तो वोट प्रतिशत में बीजेपी सबसे आगे रही थी. वहीं, जेएमएम इस लिस्ट में दूसरे स्थान पर था. सीट में कम रहने वाली कांग्रेस का वोट प्रतिशत करीब 13.98 प्रतिशत था. 2014 के चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन हुआ था. कांग्रेस कुल 62 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी. जिसमें से उसे 6 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. वही कुल 42 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी थी

क्या होती है जमानत राशि

चुनाव में अगर कोई व्यक्ति निर्दलीय या किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है तो उसके लिए चुनाव आयोग ने कुछ आवश्यक मानदंड निर्धारित किये हैं. इसमें प्रत्याशी की उम्र कम-से-कम 25 साल होने, उसका एक पंजीकृत मतदाता होने सहित एक निश्चित जमानत राशि जमा करवाना प्रमुखता से शामिल है.  वह प्रत्याशी जिसे चुनाव में कुल मतों का छठा हिस्सा प्राप्त होता है उसे जमानत राशि वापस मिल जाती है.

इसके अलावा बाकी के प्रत्याशी न केवल चुनाव हारते हैं बल्कि उनकी जमानत राशि भी चली जाती है. यदि किसी उम्मीदवार को कुल वोटों का छठा हिस्सा या 16.67 फीसदी मत नहीं मिलते हैं तो उसकी जमानत राशि जब्त हो जाती है. सामान्य वर्ग की तुलना में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए जमानत राशि आधी होती है. आयोग ने जमानत राशि इसलिए रखी है ताकि कम से कम लोग चुनाव में उतरें और इसे गंभीरता से लिया जाये.