नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में अप्रैल से बिजली दरों में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है। इसकी बड़ी वजह निजी बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम्स के बकाया भुगतान का दबाव है। सरकार अब 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक के लंबे समय से लंबित बकाये को चुकाने की तैयारी में है। ऐसे में टैरिफ बढ़ोतरी लगभग तय मानी जा रही है, हालांकि उपभोक्ताओं पर बोझ कम रखने के लिए सब्सिडी का सहारा लिया जा सकता है।
38 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया बना वजह
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में निजी बिजली कंपनियों पर कुल 38,552 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स लंबित हैं। इनमें बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) पर 19,174 करोड़ रुपये, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) पर 12,333 करोड़ रुपये और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) पर 7,046 करोड़ रुपये शामिल हैं।
क्या होते हैं रेगुलेटरी एसेट्स
रेगुलेटरी एसेट्स वे खर्च होते हैं, जिन्हें बिजली कंपनियां अभी वसूल नहीं कर पातीं और बाद में टैरिफ के जरिए उपभोक्ताओं से लेने की अनुमति दी जाती है। दिल्ली में पिछले करीब एक दशक से बिजली दरों में संशोधन नहीं होने के कारण यह राशि लगातार बढ़ती गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ा दबाव
अगस्त 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि 27,200 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स और उससे जुड़े कैरिंग कॉस्ट का भुगतान तीनों निजी डिस्कॉम्स को सात साल के भीतर किया जाए। इसके बाद अब इस राशि की वसूली के लिए ठोस योजना बनाई जा रही है।
ब्याज जुड़ने से और बढ़ा बोझ
अधिकारियों का कहना है कि वर्षों तक बकाया राशि की वसूली नहीं होने से उस पर ब्याज भी लगातार जुड़ता गया, जिससे कुल देनदारी और बढ़ गई। अदालत ने नियामक आयोग से यह भी कहा है कि वह रिकवरी का रोडमैप तैयार करे, कैरिंग कॉस्ट को शामिल करे और यह बताए कि एक दशक तक रेगुलेटरी एसेट्स बढ़ने पर समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए।
बिजली बिल में अलग से दिख सकता है सरचार्ज
संकेत हैं कि इस बकाया की वसूली उपभोक्ताओं के बिजली बिल में रेगुलेटरी एसेट सरचार्ज के रूप में की जा सकती है। यह अतिरिक्त भार सात वर्षों में धीरे-धीरे उपभोक्ताओं से वसूला जा सकता है।
पहले भी मिल चुके थे संकेत
दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद पहले ही कह चुके हैं कि डिस्कॉम्स को 27 हजार करोड़ रुपये के संचित रेगुलेटरी एसेट्स की वसूली की अनुमति दी गई है। उसी समय यह संकेत मिल गए थे कि आने वाले समय में राजधानी में बिजली दरें बढ़ सकती हैं।
सब्सिडी से राहत देने की तैयारी
सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि टैरिफ बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ताओं पर कम से कम पड़े। इसके लिए सब्सिडी व्यवस्था को जारी रखने या उसमें बदलाव कर राहत देने का विकल्प तलाशा जा रहा है।
