नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने Central Government और Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) को Employees’ Provident Fund Scheme (EPFS) के तहत वेतन सीमा (wage ceiling) में संशोधन पर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह वेतन सीमा पिछले 11 सालों से बिना बदलाव के लागू है।
EPFO Coverage से बाहर हो रहे हैं लाखों कर्मचारी
न्यायमूर्ति J.K. Maheshwari और Atul S. Chandurkar की पीठ ने यह निर्देश एक Public Interest Litigation (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में कहा गया कि वेतन सीमा स्थिर रहने के कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी EPFO social security scheme के दायरे से बाहर हो रहे हैं, जबकि यह योजना संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है।
Rs 15,000 Wage Ceiling पर उठे सवाल
याचिका के अनुसार, मौजूदा Rs 15,000 per month wage ceiling न तो inflation, न minimum wages, और न ही per capita income growth से जुड़ी हुई है। इसके बावजूद इसे वर्षों से संशोधित नहीं किया गया, जो इसे arbitrary और irrational बनाता है।
Expert Committees की सिफारिशें भी नजरअंदाज
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि विभिन्न expert bodies और Parliamentary committees समय-समय पर EPF wage ceiling बढ़ाने की सिफारिश कर चुकी हैं, लेकिन उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
Article 32 के तहत दायर हुई PIL
यह याचिका Article 32 of the Constitution के तहत अधिवक्ता Pranav Sachdeva और Neha Rathi के माध्यम से दायर की गई थी। इसमें EPFS को अधिक समावेशी बनाने और बदलती आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप wage limit संशोधित करने की मांग की गई है।
अब 4 महीने में लेना होगा फैसला
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार और EPFO पर दबाव बढ़ गया है कि वे EPF wage ceiling revision पर तय समयसीमा में निर्णय लें। यह फैसला लाखों कर्मचारियों की retirement savings और social security benefits पर सीधा असर डाल सकता है।
