नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी की है। Ministry of Finance की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
इसी तरह ATF पर भी ड्यूटी 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। हालांकि, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क पहले की तरह शून्य ही रखा गया है, जिससे इस सेक्टर को राहत मिली है।
क्या है फैसले के पीछे वजह?
सरकार का यह कदम घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकार चाहती है कि देश में डीजल और ATF की पर्याप्त सप्लाई बनी रहे।
किन सेक्टरों पर पड़ेगा असर?
डीजल पर निर्यात शुल्क बढ़ने से तेल कंपनियों के लिए विदेशों में निर्यात करना महंगा हो जाएगा, जिससे घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ सकती है। वहीं ATF महंगा होने से एविएशन सेक्टर की लागत पर असर पड़ सकता है।
पेट्रोल पर क्यों नहीं बढ़ी ड्यूटी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल की मांग और सप्लाई संतुलित रहने के कारण सरकार ने इस पर कोई बदलाव नहीं किया है, ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब सरकार ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण दोनों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
