देवता विष्णु नारायण के सम्मान में मनाए जाने वाला फागुली उत्सव आरंभ

देवता विष्णु नारायण के सम्मान में मनाए जाने वाला फागुली उत्सव आरंभ-Panchayat Times

कुल्लू. बंजार उपमंडल की अनेक ग्राम पंचायतों के ग्रामीण क्षेत्रों ,चैहणी , वेहलो, बाहू, ,देउठा, चेड़ा, फरयाडी , पेखडी, गौशाला नरांहा ,वलौन ,कलवारी ,फरयाड़ी, चिपणी, हिड़व, खमारडा, परवाड़ी, गरुली, मोहणी में भी विष्णुनारायण के सम्मान में फागुली उत्सव वीरवार से आरंभ हो गया है. बर्फबारी के पश्चात शुरू हुआ.

फागली उत्सव में भगवान विष्णु नारायण के क्षेत्रों में से फागुली उत्सव की शुरूआत हो गई है. जिससे की घाटी का वातावरण एक बार फिर से देवमयी होना आरंभ हो गया है. देव समाज से जूड़े हुए लोगों ठाकुर चंद महंत ,सत्यदेव नेगी ,तुलसी राम ,संगत राम ,रमेश शर्मा ,विनोद कुमार ,विरेन्द्र कुमार ,रमेश चंद मुरारी लाल शर्मा ,टेक राम ,खयाली राम शर्मा ,धर्म दास ,मान ंिसह , पूर्ण चंद ,लाल चंद ,धनी राम शर्मा आदि का कहना है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी फाल्गुन संक्रांति से मनाया जाने बाला फागुली उत्सव भगवान विष्णु नारायण के दस अवतारों की गाथाओं के साथ बुराई पर अच्छाई की,पाप पर पुण्य की और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में सोमवार से आरंभ हो गया. जिससे उपमंडल से बाहर रहने बाले सभी ग्रामीण इस उत्सव में भाग लेने के लिए घर लौट आए हैं.

देवता विष्णु नारायण के सम्मान में मनाए जाने वाला फागुली उत्सव आरंभ-Panchayat Times

इस उत्सव में विष्णुनारायण के कृष्णावतार की रास लीलाओं की गाथाओं का गुणगान स्थानीय लोग पहाड़ी परंपरागत तरीके से ढोल, नगाड़े, मधुर ध्वनि के साथ करते है.फागुली उत्सव बिष्णु नारायण भगवान की पौष माह के अंतिम सप्ताह में स्वर्गलोक की यात्रा व मकर संक्रांति की पूर्व संध्या को भूलोक पर बापसी के बाद उनके पहले धार्मिक अवतार समारोह के रूप में मनाया जा रहा है और उनके द्वारा रचाई गई लीलाओं का गुणगान 18 लोकगीतों के माध्यम से गुणगान किया जा रहा है.

इन लोकगाथाओं के ऐतिहासिक प्रमाण विष्णु पुराण सहित अन्य देव ग्रंथों व पुराणों में भी मिलते हैं. फागुली उत्सव में अश्लील गालियों का दौर भी आरंभ हो गया है. इन अश्लील गालियों को फागुली उत्सव का ही एक अंग माना जाता है, इसलिए इन्हें बुरा नहीं माना जाता है वल्कि इन्हे बुरी शक्तियों को भगाने का एक उपाय माना जाता है. फागुली उत्सव पर बिष्णुनारायण अपने निवास स्थानों व देवालयों से बाहर निकलकर अपने मंदिरों में परंपरागत पालकियों, रथों व बीठ रूप में अपने हारियान क्षेत्र की प्रक्रिमा करते है उनके सम्मान में अवतार समारोह मनाया जहां घटनाक्रम का वृतांत मंदिर में देव खेल में हारियानों को वताया जाता है. तत्त पश्चात मुखौटो को पहनी ग्रामीणों की टालिया घर घर जा दस्त देती है. दूसरे व तीसरे दिन बीठ रूपी विष्णु भगवान की प्रतिमा जोकि नरगिस,बरूआं ,नौयर , के फूलों व पत्तीयों से सुसजित गुलदस्ते को विष्णुभगवान के सम्मान में सिर पर उठा कर हारियान क्षेत्र में घुमाया जाता है और शाम होने पर विठ रूपी गुलदस्ते को सैकडो हारियानों के हजूम में फैंक दिया जाता है जो व्यक्ति इस वीठ को पकड़ता है. वह धन धान्य और वर व पुत्र प्राप्ति का आर्शीवाद प्राप्त विष्णु भगवान से हसिल करता है व सभी हारियानों के लिए धाम का आयोजन करता है .