लोकसभा चुनाव 2019 को प्रभावित करेगा फेक न्यूज : सोशल मीडिया मैटर्स सर्वे

फर्जी खबरों पर करवाया गया सर्वे, निकला यह परिणाम-Panchayat Times

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 पर फर्जी खबरों, गलत सूचनाओं के प्रभाव का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया मैटर्स कि ओर से एक सर्वे करवाया गया था. यह एक ऑनलाइन सर्वे था. इसने फर्जी खबरों को लेकर विभिन्न आंकडों पर लोंगो का ध्यान आकर्षित करवाया.

भारत लोकसभा चुनाव कराने को लेकर तैयार. इस बार 90 करोड़ मतदाता अपने वोट के माध्यम से उम्मीदवार का चुनाव करेंगे. लेकिन बहुत लोग इस चुनाव में फर्जी खबरों के प्रभाव से जूझ रहे हैं. इस बार के चुनाव में 9.4 प्रतिशत नए मतदाता अपने मत को प्रयोग करेंगे और नई सरकार को चुनने में अपनी भागीदारी देंगे.

इस सर्वे में 54 प्रतिशत लोंगो से बातचीत की गई. इनकी उम्र 18-25 वर्ष थी. सर्वे में 56 प्रतिशत पुरुष, 43 प्रतिशत महिलाओं और 1 प्रतिशत ट्रांसजेंडरों ने अपनी प्रतिक्रिया दी.

फेक न्यूज पर लोंगो की राय

बता दें कि #DontBeAFool फेक न्यूज पर भारत में यह पहला सर्वे था. फेक न्यूज पर लोंगो की राय और इसका उनपर क्या प्रभाव पड़ता है यह जानना इस सर्वे को कराने का उद्देश था.  इसके साथ ही मतदाता से यह भी जानने की कोशिश की गई कि चुनाव के दौरान गलत सूचना से वह प्रभावित होते हैं या नहीं.

इस सर्वे की खोज देश भर के 628 मतदाताओं के नमूने के आकार पर आधारित है, जिन्होंने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से फेक न्यूज की पहचान कराने के ऊपर अपने विचार और व्यक्तिगत अनुभव व्यक्त किए.

यह सर्वे बताता है कि 53 प्रतिशत फर्जी खबरों को विभिन्न चैनलों के माध्यम से परोसा जा रहा है. वहीं फेसबुक और व्हाट्सएप गलत सूचना के फैलाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. सर्वे से यह मालूम चला कि 96 प्रतिशत जनसंख्या को व्हाट्सएप के माध्यम से नकली समाचार मिलते हैं. 48 प्रतिशत जनसंख्या इस बात से सहमत हुई कि उन्हें पिछले 30 दिनों में किसी न किसी माध्यम से फेक न्यूज को पढ़ा है.

नागरिकों को इस बात की कम जानकारी है कि किसी समाचार आइटम को प्रमाणित करना है लेकिन #DontBeAFool सर्वे में यह सामने आया है कि 41 प्रतिशत लोग फेक न्यूज की पहचाने के लिए गूगल, फेसबुक और ट्विटर की मदद लेते हैं. एक सकारात्मक आकड़े के तहत आबादी के 54 प्रतिशत लोगों ने यह जताया है कि कभी भी फेक न्यूज से प्रभावित नहीं हुए हैं. दूसरी ओर 43 प्रतिशत ऐसे लोग हैं. जिनके जानकार फेक न्यूज से गुमराह हुए हैं.

यह सर्वे एक प्रयास है यह जानने का कि किन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों, चैनलों के माध्यम से माध्यम से नकली समाचार परोसा जा रहा है, लोग कैसे इसकी पहचान कर रहे हैं और इस पर अंकुश लगाने के लिए क्या साधन अपनाए जा सकते हैं.