ललमटिया खदान हादसा मामले में हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को दी अंतिम चेतावनी

रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने ललमटिया खदान हादसे की जांच कराने को लेकर केन्द्र सरकार का रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केन्द्र से पूछा कि वह इस हादसे की जांच कराएगी या नहीं? कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर केन्द्र की सरकार को जवाब देने को कहा है. मोहम्मद सरफराज ने मामले को लेकर रांची हाईकोर्ट में जनहित याचिक दायर की थी.

गुरुवार को हुई सुनवाई में कहा गया कि खदान में हुए हादसे के बाद केन्द्र सरकार कोर्ट ऑफ इंक्वारी करवाती है. रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में हादसे से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाया जाता है. लेकिन ललमटिया खदान हादसे में अबतक कोर्ट ऑफ इंक्वारी नहीं हो पाई है. याचिकाकर्ता ने डीजीएमएस (महानिदेशक, खनन सुरक्षा) की जांच को असंतोषजनक बताया है.

केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यह मामला श्रम मंत्रालय में लंबित है. वहीं खनन कंपनी ईसीएल (ईस्टर्न कोल लिमिटेड) ने हादसे के लिए डीजीएमएस को दोषी ठहराया. कंपनी ने कहा कि डीजीएमएस रिपोर्ट के बाद ही खनन के लिए आदेश दिए जाते हैं. ईसीएल ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश से हादसे की जांच करवाई जाए.

दिसंबर 2016 में गोड्डा जिले के ललमटिया में खदान हादसा हुआ था. इसमें 80 मजदूर दबकर मर गए थे. केवल 18 शवों को ही बाहर निकाला जा सका.