‘गायब होता देश’ के रणेंद्र को पहला विमला देवी स्मृति सम्मान

प्रथम विमला देवी स्मृति सम्मान से सम्मानित होंगे उपन्यासकार रणेंद्र-Panchayat Times
साभार इंटरनेट

रांची. कुशीनारा उच्च अध्ययन संस्थान की ओर से ‘प्रथम विमला देवी स्मृति सम्मान 2019’, सुप्रसिद्ध समकालीन उपन्यासकार रणेंद्र को दिए जाने की घोषणा की गई है. उन्हें यह पुरस्कार हिंदी साहित्य की उपन्यास विधा में मौलिक और जनपक्षधर लेखन के लिए दिया जा रहा है. निर्णायक मंडल में प्रोफेसर अनिल कुमार राय (अध्यक्ष हिंदी विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय) डॉ. अनिल कुमार सिंह (हिंदी विभाग, साकेत महाविद्यालय), डॉ. साजिद खान (गांधी फैजान, पी.जी. कॉलेज शाहजहांपुर) और डॉ. सर्वेश कुमार मौर्य (एनसीईआरटी मैसूर) शामिल थे.

इस पुरस्कार के अंतर्गत रणेंद्र को स्मृति चिह्न, प्रमाणपत्र और ग्यारह हजार रुपए की राशि सम्मानार्थ दी जाएगी. सम्मान और लेक्चर समारोह की तारीख जल्दी ही घोषित की जाएगी. इस बात की जानकारी कुशीनारा उच्च अध्ययन संस्थान के सचिव आनंद पांडेय ने दी.

बता दें कि रणेंद्र एक कथाकार और विचारक हैं. उन्होंने समय-समय पर देश के अनेक प्रगतिशील समूहों से गंभीर चर्चाएं की हैं. हाल ही में उन्होंने आईआईटी कानपुर के छात्रों से भी संवाद किया है. वह मानते है कि यह तेज सक्रियता और प्रतिरोध किए जाने वाला समय है. रणेन्द्र ‘पहल’ के पाठकों के लिए भविष्य में भी जरूरी लेखन करते रहेंगे. रणेन्द्र को सर्वाधिक ख्याति उनके दो उपन्यासों, ‘ग्लोबल गांव का देवता’ और ‘गायब होता देश’ से मिली है. ये उपन्यास आगामी गंभीर और संगीन लड़ाई की तरफ संकेत करते हैं. नए आलोचक प्रणय कृष्ण ने ‘पहल’ के पिछले अंक में रणेन्द्र पर एक टिप्पणी की है.