जल जीवन मिशन ग्रामीण की अब ऑनलाइन होगी निगरानी, डैशबोर्ड के जरिये जान पायेंगे की कैसा पानी हो रहा है सप्लाई, जानिए और क्या होगा फायदा

जल जीवन मिशन ग्रामीण की अब ऑनलाइन होगी निगरानी, डैशबोर्ड के जरिये जान पायेंगे की कैसा पानी हो रहा है सप्लाई, जानिए और क्या होगा फायदा - Panchayat Times
Women inspecting a water dashboard in a village

नई दिल्ली. देश के छह लाख से अधिक गांवों में जल जीवन मिशन के कार्यान्वन की प्रभावी निगरानी के लिए केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सेंसर आधारित आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) उपकरण का इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया है.

इसके लिए राष्ट्रीय जल जीवन मिशन ने टाटा कम्यूनिटी इनिशिएटिव ट्रस्ट (टीसीआईटी) और टाटा ट्रस्ट्स के साथ मिलकर पांच राज्यों उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के दूरदराज स्थित कई गांवों में पायलट प्रोजेक्ट्स पूरे किए.

कैसे काम करती है ये तकनीक

इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) पर आधारित रिमोट मॉनिटरिंग, सेंसर का उपयोग करके बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के लगभग वास्तविक जानकारी उपलब्ध करवाती है. इससे जमीनी स्तर पर प्रभावी निगरानी और प्रबंधन होता है.

प्रत्येक घर के लिए नल के पानी की नियमित आपूर्ति के लक्ष्य के साथ, ग्रामीण पेयजल की आपूर्ति योजना के लिए, परिचालन क्षमताओं में सुधार, लागत में कमी, शिकायत निवारण आदि के साथ, वास्तविक माप और निगरानी भी महत्वपूर्ण है.

अगर हम सब हर रोज ये जान पायेंगे कि कल कितना काम हुआ था और आज कितना हो रहा है तो इससे पानी जैसे महत्वपूर्ण संसाधन के लिए पारदर्शिता लाने में सुधार करेंगे.

परिचालन क्षमता प्रदान करने के साथ जल सेवा वितरण के विभिन्न प्रासंगिक पहलुओं जैसे कि मात्रा, अवधि, गुणवत्ता, दबाव और स्थिरता मापने के लिए कई प्रकार के सेंसर लगाए गए हैं. जैसे कि फ्लो मीटर्स, भूजल स्तरीय सेंसर, क्लोरीन विश्लेषक, प्रेशर सेंसर, पम्प कंट्रोलर आदि.

इससे फायदा क्या?

इन पायलट्स से कई परिणाम निकले क्योंकि इससे कटौती, लीकेज, कम दबाव जैसे पानी की सप्लाई में सामने आने वाली आम समस्याओं को पहचानने और कार्यस्थल पर समाधान निकालने में मदद मिली.

इसने हाल ही में तेजी से घटते भूजल स्तर के बारे में अधिकारियों और समुदाय दोनों को चेताया जिससे कि ग्रामीणों ने अपने बोरवेल के पुनर्भरण (बारिश के समय) के लिए स्रोत को मजबूत करने वाला ढांचा बनाया.

डैशबोर्ड पर देख सकेंगे पानी में कौनसा पदार्थ कितनी मात्रा में

गांव में स्थानीय भाषा में विजुअल डैशबोर्ड वाले छोटी टीवी स्क्रीन हैं जिससे वीडब्ल्यूएससी (पानी समिति) को सही कदम उठाने में मदद मिलती है. पहले, इस प्रोजेक्ट के तहत आने वाले कुछ गांवों में नियमित रूप से पानी की कीटाणुशोधन प्रक्रिया नहीं की जाती थी.

अपने गांव की स्थिति जानने के लिए https://ejalshakti.gov.in/jjmreport/JJMIndia.aspx पर जायें.

अब वीडब्ल्यूएससी (पानी समिति) अपने गांव की आईओटी स्क्रीन पर दिखाई देने वाले अलग-अलग पैरामीटर के माध्यम से देखते हैं कि अवशिष्ट क्लोरीन के स्तर के आधार पर कब पानी का कीटाणुशोधन करना है.

ग्रामीण भारत के लिए आईओटी का विशिष्ट रूप से निर्माण करना वाई-फाई ब्रॉडबैंड और सेलुलर कनेक्टिविटी के नजरिए से महत्वपूर्ण है. वास्तव में, ग्रामीण क्षेत्र में पानी के ज्यादातर स्थानों पर आईओटी उपकरणों को बिजली देने के लिए ग्रिड तक आसान पहुंच के लिए नेटवर्क की कमी है.

क्या है ग्रामीण भारत में पेयजल सप्लाई ससे संबधित समस्याऐं

भारतीय गांवों में पेयजल आपूर्ति प्रणाली, भूजल स्रोत के सूखने, पम्प की विफलता, अनियमितता और अपर्याप्त जल आपूर्ति जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है.

ये चुनौतियां सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को बढ़ावा देती हैं जैसे कि महिलाओं को अभी भी देश के कई हिस्सों में कुछ दूरी से लेकर कई किलोमीटर तक की दूरी से पानी लाना पड़ता है, कई प्रदुषित जल से संबधित बीमारियां जिनसे आसानी से बचा जा सकता है, आर्थिक-मजदूरी का नुकसान और चिकित्सा पर खर्च आदि है.

जल जीवन मिशन

देश में 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण घर में नल के पानी का कनेक्शन प्रदान करने के लिए केंद्रीय सरकार का फ्लैगशिप कार्यक्रम जल जीवन मिशन (जेजेएम), जिसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा तौर पर लागू करना है.

जल जीवन मिशन कार्यक्रम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में नल के कनेक्शन के जरिए प्रतिदिन गुणवत्तापूर्ण पानी की पर्याप्त मात्रा (55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन-एलपीसीडी) की आपूर्ति के प्रबंधन और निगरानी के लिए डिजिटल वॉल और रिमोट कमांड व नियंत्रण केंद्र स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है.

भारत और पानी

विश्व भर में उपलब्ध कुल ताज़े जल का 4% हिस्सा भारत में पाया जाता है जो विश्व की 17% आबादी की आवश्यकता को पूरा करता है. जून 2018 में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत इतिहास के सबसे खराब जल संकट का सामना कर रहा है.

भारत में लगभग 60 करोड़ लोग या लगभग यूं कहे कि देश की 45% आबादी उच्च व गंभीर जल तनाव का सामना कर रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2030 तक भारत की लगभग 40% आबादी की पीने के पानी तक पहुंच नहीं होगी और वर्ष 2050 तक जल संकट के कारण भारत को सकल घरेलू उत्पाद में 6% नुकसान का सामना करना पड़ेगा.