भारत देश में खाद्यान्न भंडारण एक बड़ी समस्या, जानिए कैसे होता है खाद्यान्न संग्रहण तथा प्रबंधन

भारत में खाद्यान्न भंडारण एक बड़ी समस्या, जानिए कैसे होता है खाद्यान्न संग्रहण तथा प्रबंधन - Panchayat Times

नई दिल्ली. पिछले दिनों भंडारण की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED) द्वारा संग्रहीत प्याज का आधा स्टॉक व्यर्थ हो गया. ज्ञात हो कि पिछले दिनों में प्याज की भारी कमी के चलते भारत ने हजारों टन प्याज का आयात किया है. इसके अलावा अन्य खाद्यान्न फसलों को होने वाला नुकसान भी भारत में अनाज भंडारण की समस्या को उजागर करता हैं.

केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPHET) के अनुसार, भारत में कटाई के दौरान तथा कटाई उपरांत प्रमुख खाद्यान्न फसलों के कुल उत्पादन का 4.65% से 5.99% भाग व्यर्थ हो जाता है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में फसलों की कटाई के उपरांत भारतीय किसानों को प्रतिवर्ष लगभग 92,651 करोड़ रुपए का नुकसान होता है जिसका मुख्य कारण कमजोर संग्रहण तथा यातायात व्यवस्था है.

कैसे होता है भारत में खाद्यान्न संग्रहण तथा प्रबंधन:

भारत में खाद्यान्नों की खरीद, संग्रहण, स्थानांतरण, सार्वजनिक वितरण तथा बफर स्टॉक के रख-रखाव की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य निगम (FCI) की है. FCI का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन हेतु अनाजों के स्टॉक की संग्रहण आवश्यकताओं को पूरा करना है. FCI न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर किसानों से खाद्यान्नों की खरीद करता है. सभी खरीदे गए अनाज केंद्रीय भंडार (Central Pool) का निर्माण करते हैं. भारत में खाद्यान्न का संग्रह पारंपरिक तरीके से किसानों द्वारा किया जाता है, जबकि बचा हुआ अनाज का संग्रहण सरकारी एजेंसियों जैसे – FCI, केंद्रीय तथा राज्य भंडारण निगमों द्वारा किया जाता है.

कितने तरीके से होता है भारत में अनाज संग्रहण:-

भूमिगत संग्रहण संरचनाएं :-

इन संरचनाओं का निर्माण जमीन की खुदाई करके किया जाता है और इनका आकार कुएं की भाँति होता है. इनमें अनाजों के संग्रहण से किसी बाहरी खतरे जैसे- चोरी, वर्षा, हवा इत्यादि से बचा जा सकता है.

कवर एंड प्लिंथ(CAP) स्टोरेज :-

यह अनाज संग्रह करने की सामान्य एवं सस्ती विधि है. इसके तहत अनाज को अस्थायी तरीके से खुले में किसी वाटरप्रूफ वस्तु से ढक कर रख दिया जाता है. इसमें तेज हवा से नुकसान होने का खतरा होता है.

सिलो(Silos) :– यह धातु या स्टील से निर्मित सिलिंडर के आकार की संरचना होती है. इसमें अनाज को बड़ी मात्रा में कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से रखा जाता है. प्रत्येक सिलो की क्षमता लगभग 25,000 हज़ार टन होती है.

भंडार गृह(Warehouse) :-

ये वैज्ञानिक विधि से निर्मित संग्रह संरचनाएँ होती हैं ताकि इसके माध्यम से संग्रहीत अनाज की मात्रा तथा गुणवत्ता को बरकरार रखा जाए. जैसे- केंद्रीय भंडारण निगम (CWC), राज्य भंडारण निगम (SWC) तथा FCI.

समस्याएं

अपर्याप्त प्रबंधन :-

प्रबंधन की कमी की वजह से भंडारों में अनाज को उसकी आयु से भी अधिक समय तक रखा जाता है जिससे कीड़े, चूहे, पक्षियों आदि द्वारा नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है. विभिन्न राज्यों में उपलब्ध भंडारण क्षमता 75% से भी कम की है जिसकी वजह से उसमें ताजे अनाजों को रखने के लिये जगह नहीं होती है.

अवैज्ञानिक संग्रहण :-

देश में मौजूद लगभग 80% भंडारण सुविधाएँ परंपरागत तरीके से ही संचालित होती हैं जिसकी वजह से प्रतिकूल मौसमी दशाओं जैसे- तेज बारिश, बाढ़, तूफान आदि की स्थिति में अनाजों के नष्ट होने की संभावना अधिक रहती है.

FCI की भंडारण क्षमता में कमी :-

केंद्रीय भंडार में खाद्यान्नों की मात्रा में बढ़ोतरी तथा सिलो, गोदामों एवं भंडारगृहों की अपर्याप्त संख्या के कारण FCI उनके भंडारण में सक्षम नहीं है. इसके अलावा वर्तमान में विद्यमान भंडारण सुविधाएँ अन्य आवश्यक सुविधाओं से एकीकृत नहीं हैं और इनमें सहायक अवसंरचनाओं जैसे- एकीकृत पैकिंग हाउस, तथा पकाने वाली इकाइयों (Ripening Units) का अभाव है.

कोल्ड स्टोरेज की समस्या :-

भारत में अधिकांश कोल्ड स्टोरेज संरचनाएँ असंगठित क्षेत्र की हैं तथा उन्हें पारंपरिक सुविधाओं से चलाया जा रहा है. देश में कोल्ड स्टोरेज का वितरण भी संतुलित नहीं है देश के अधिकांश कोल्ड स्टोरेज उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब तथा महाराष्ट्र में स्थित हैं. इसके अलावा देश के कुल कोल्ड स्टोरेज क्षमता के दो-तिहाई भाग में केवल आलू रखा जाता है.