कुरुक्षेत्र पहुंची सुषमा स्वराज : “मैं हर रोज पढ़ती हूं गीता”

केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि गीता जीवन जीना सिखाती
प्रतीक चित्र

कुरुक्षेत्र. केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि गीता जीवन जीना सिखाती है. तकनीक से उन्नति का मार्ग बढ़ता है, लेकिन जीवन जीने की कला भगवान श्रीकृष्ण के दार्शनिक ग्रंथ गीता में है. गीता विश्व का सबसे बड़ा दार्शनिक ग्रंथ है. गीता में सभी दुखों का निवारण है. वे मंगलवार को थीम पार्क में आयोजित अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के समापन पर आयोजित गीता वैश्विक पाठ में बतौर मुख्य अतिथि बोल रही थी.

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उन्होंने थीम पार्क में मौजूद बच्चों को आह्वान किया कि हर दिन गीता में दिए गए दो श्लोकों का उच्चारण करें और उन्हें जीवन में धारण करें. उन्होंने कहा कि वे खुद हर रोज गीता के दो श्लोकों का अध्ययन करती हैं और पूरी गीता का संकल्प के साथ अध्ययन भी कर चुकी हैं. पिछले दिनों सोशल मीडिया पर यह चर्चा चली कि हर रोज गीता के दो श्लोक क्यों, पांच या दस भी हो सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे एकाग्रता के साथ उनका अध्ययन करती हैं और वे इसी क्रम को जारी रखेंगी. इस अवसर पर उड़ीसा के राज्यपाल गणेशी लाल, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, सुधांशु महाराज, विधायक सुभाष सुधा सहित अन्य संत मौजूद थे.

केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि गीता जीवन जीना सिखाती

गीता में कर्म करने का संदेश : रामदेव

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि गीता में कर्म करने का संदेश दिया गया है. इसलिए गीता के संदेश को आगे बढ़ाते हुए समाज की उन्नति के लिए काम करें. उन्होंने भी योग के जरिये पूरे विश्व को स्वास्थ्य का मंत्र दिया है. इसके साथ ही पतंजलि के उत्पादकों के जरिये विदेशी कंपनियों को करारी शिकस्त दी है.

गीता जीवन जीने की शैली : इंद्रेश

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश कुमार ने कहा कि गीता जीवन जीने की एक शैली है. मानव का ही नहीं प्राणी मात्र का भी कल्याण गीता में निहित है. गीता में बेटी, बहन और मां के सम्मान का संदेश दिया गया है.