दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का चुनाव देखने आ रहे हैं विदेशी सैलानी

चुनाव प्रक्रिया को जानने, देखने और परखने के लिए 700 विदेशी... - Panchayat Times
प्रतीक चित्र

नई दिल्ली. सात चरणों के लोकसभा चुनावों के पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होने जा रहा है. उधर, हमारे देश की चुनाव प्रक्रिया को जानने, देखने और परखने के लिए 700 विदेशी सैलानियों का पहला दल 10 अप्रैल को भारत आ रहा है. यह दल कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व के स्थानों या महलों-किलों या हवेलियों को देखने नहीं आ रहा बल्कि यह दल हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में हो रहे लोकसभा के चुनावों की प्रक्रिया देखने आ रहा है.

खास बात यह कि इन्हें भारत सरकार या किसी देश की एजेन्सी द्वारा नहीं बुलाया या भेजा जा रहा है, बल्कि यह तो नए ट्रेंड के रुप में इलेक्शन टूरिज्म पैकेज के रुप में आ रहा है. दरअसल सारी दुनिया में हमारी चुनाव व्यवस्था को आदर्श व्यवस्था के तौर पर जाना जाता है. यही कारण है कि पर्यटकों के टूर आयोजकों द्वारा हमारे देश में हो रहे चुनावों को भी पर्यटन के रुप में प्रस्तुत किया जा रहा है और इलेक्शन टूर आयोजित किए जा रहे हैं. देश के करीब 35 टूर आपरेटरों ने देश में सात चरणों में हो रहे लोकसभा के चुनावों का टूर पैकेज बनाकर विदेशी पर्यटकों के सामने रखा है. अब तक लगभग 1600 लोगों ने तो अपनी बुकिंग करवा भी ली है. इसमें पहले चरण में 700 पर्यटकों का दल 10 अप्रैल को हमारे देश में आ रहा है. टूर ऑपरेटरों का कहना है कि सात चरणों के इस चुनावी सीजन में एक मोटे अनुमान के अनुसार दस हजार से अधिक पर्यटक इलेक्शन टूरिज्म पैकेज के तहत आने वाले हैं.

टूर ऑपरेटरों द्वारा इलेक्शन टूर पैकेज को जिस तरह से तैयार किया गया है उसमें पर्यटकों द्वारा तय किए गए क्षेत्रों में चुनाव की तैयारियों, चुनावी सभाओं, रैलियों, रोड शो के साथ ही मतदान होते हुए भी विदेशी सैलानियों को दिखाया जाएगा. इसमें कोई दो राय नहीं कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हमारे देश में है. इसमें भी दो राय नहीं हो सकती कि दुनिया के देशों में हमारी चुनाव प्रणाली और व्यवस्था को आदर्श माना जाता है. निष्पक्ष और निडर मतदान की व्यवस्था हमारी विशेषता है. ऐसे में दुनिया के देशों की हमारे चुनावों पर नजर रहती है. माना जा रहा है कि अमेरिका, इंग्लैंड सहित योरोपीय देशों के साथ ही रुस आदि देशों के सैलानी इलेक्शन टूरिज्म पैकेज से प्रमुखता से जुड़ेंगे.
दुनिया के अधिकांश देशों के चुनाव और हमारे चुनावों में बड़ा अंतर यह है कि पाकिस्तान सहित कई देशों में होने वाले चुनावों की निष्पक्षता को लेकर प्रश्न उठते रहे हैं. यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ सहित कई संस्थाओं को उन देशों में चुनावों की निष्पक्षता जांचने के लिए दूसरे देशों से पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं. हमारे देश से भी अन्य देशों में बतौर पर्यवेक्षक जाते रहे हैं. अमेरिका में वहां के आम चुनाव दिखाने का चलन कई सालों से चल रहा है. वहां की कई संस्थाएं अपने खर्चे पर पत्रकारों और राजनेताओं सहित दूसरे देश के प्रबुद्धजनों को वहां के चुनाव देखने के लिए बुलाती रही हैं.

हमारे देश में आम चुनाव किसी महोत्सव से कम नहीं होते. नामांकन से लेकर मतदान और फिर मतगणना तक अलग ही तरह की फिजां बनी रहती है. इलेक्शन कमीशन ने जिस तरह से चुनाव प्रक्रिया को आसान व सहज बनाया है उससे लोगों में मतदान के प्रति रुझान बढ़ा है. युवाओं में तो अलग ही जोश देखने को मिलता है. फिर राजनीतिक दलों द्वारा जिस तरह से इलेक्शन कैंपेन चलाया जाने लगा है और जिस तरह से रोड शो और चुनावी रैलियों के माध्यम से शक्ति प्रदर्शन किया जाता है, वह विदेशियों के लिए निश्चित रुप से किसी आश्चर्य से कम नहीं माना जा सकता. चुनाव आयोग द्वारा जिस तरह से निष्पक्ष चुनाव की तैयारियां की जा रही हैं. चुनाव से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी मतदाताओं तक अभियान चलाकर पहुंचाई जा रही है, वह चुनावों की निष्पक्षता को और अधिक पुष्ट करती है. लोकसभा क्षेत्रों में जिस तरह से कार्मिकों का नियोजन किया जाता है और जिस तरह से पर्यवेक्षकों को पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, वह अनुकरणीय है. इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती और मतदाताओं में विश्वास पैदा करने के लिए फ्लैग मार्च आदि की व्यवस्था से लोग निडर होकर मतदान करने लगे हैं.

ईवीएम और अब तो वीवीपैट ने चुनावों की रंगत ही बदल दी है. मतदाताओं को चुनाव आयोग की पर्ची से मतदान केन्द्र से लेकर सभी जानकारी सहज ही मिल जाती है. ऐसे में मतदान का प्रतिशत बढ़ना समय की मांग हो गई है.
लोकसभा के चुनाव पांच साल में होते हैं पर हमारे देश में विधानसभाओं के चुनाव तो किसी न किसी राज्य में प्रतिवर्ष होते रहते हैं. ऐसे में राज्य विशेष को फोकस करके भी इलेक्शन टूरिज्म से लोगों को आकर्षित किया जा सकता है. माना जाना चाहिए कि आने वाले समय में इलेक्शन टूरिज्म भी एक बड़े आयोजन के रुप में दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने में कामयाब होगा. इससे सबसे बड़ा लाभ जहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होगी वहीं हमारी लोकतांत्रिक व चुनावी व्यवस्था को विदेशी लोग नजदीक से देख सकेंगे. इससे हमारी व्यवस्था और लोकतंत्र की गरिमा में ही बढ़ोतरी होगी.