दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का 81 वर्ष में निधन

नई दिल्ली. दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित का शनिवार दोपहर निधन हो गया. उन्हें सुबह ही दिल्ली के एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. वह 81 वर्ष की थीं.

शीला दीक्षित की बेटी लतिका ने उनके निधन की पुष्टि की है. शीला दीक्षित पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं. हाल ही में उन्होंने उत्तरी-पूर्वी दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा था. चुनाव हारने के बाद भी वह दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते काम करती रहीं. दोपहर 3.30 बजे उन्होंने एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल ने अंतिम सांस लीं.

एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. अशोक सेठ ने कहा कि सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें दोपहर 3.15 मिनट पर दोबारा दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था जहां उन्होंने 3.55 पर अंतिम सांस ली.

शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है. दिल्ली के पंजाबी खत्री (कपूर) परिवार में जन्म लेने वाली शीला की कांग्रेस के बड़े नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे विनोद दीक्षित से शादी हुई थी. इसी के साथ उनका राजनीतिक सफर भी शुरू हुआ था. दिल्ली की सबसे ज्यादा समय यानी 15 साल तक (1998 से 2013) तक मुख्यमंत्री रही हैं. शीला के बारे में कहा जाता है कि वह सबको साथ लेकर चलती हैं. मुख्यमंत्री रहते हुए भी वह जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं से जुड़ी रहीं.

दिल्ली में तीन बार लगातार कार्यकाल संभालने के बाद 2013 में उन्हें उन्हीं की नई दिल्ली सीट से आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने हरा दिया था. इसके बाद उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया. इस बीच केन्द्र में सरकार बदल गई और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. उत्तर प्रदेश में 2017 के चुनावों के दौरान उन्हें ब्राह्मण चेहरे के तौर पर मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया  था.

शीला दीक्षित दिल्ली के कान्वेंट स्कूल में पढ़ीं. बाद में उन्होंने दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज से कला में स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होंने 1984 से लेकर 1989 तक कन्नौज लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया. इस दौरान वह संसदीय कार्य राज्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री रही. 1998 में शीला दीक्षित दिल्ली की पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के लाल बिहारी तिवारी से हार गईं.

शीला दीक्षित 1998 में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी. इसके बाद 15 साल तक मुख्यमंत्री रही. पहले पांच साल तक उन्होंने गोल मार्केट सीट और बाद में नई दिल्ली सीट का प्रतिनिधित्व किया.