स्वतंत्रता सेनानी हरि सिंह पंचतत्व में विलीन

धर्मपुर (मंडी). गांव से संबंध रखने वाले स्वतंत्रता सेनानी हरि सिंह 97 वर्ष की आयु में अपनी जीवन यात्रा समाप्त कर पंचतत्व में विलीन हो गए. आज उनके पैतृक गांव ढूली में पूरे राज्कीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. उनके अंतिम संस्कार में हिमाचल प्रदेश सरकार में आईपीएच मंत्री महेन्द्र ठाकुर, भाजपा मीडिया प्रभारी नरेन्द्र अत्री समेत  विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधियों और जनता ने उनके अंतिम संस्कार में भाग लेकर उन्हें नमन किया.

यह जानकारी टिहरा पंचायत प्रधान सुरेंन्द्र पठानिया ने दी. इस मौके पर जिला प्रशासन के तरफ से उन्हें नमन किया गया. पूलिस प्रशासन ने अंतिम सलामी दी गई. इस मौके पर बीडिसी चेयरमैन विनोद कुमार, टिहरा पंचायत प्रधान सुरेंन्द्र पठानिया, उप प्रधान बृज लाल, कोट पंचायत प्रधान यश पठानिया, मशहुर लोक गायक जगदीश सनवाल, सुख राम, ओम चंद, कैप्टन शेर सिंह अत्री, गोविद चंद, प्रेम सिंह, डा. प्रदीप, समेत कई सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे.

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हरि सिंह 2 अगस्त 1940 को पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हुए. उन्होनें मेरठ में एक वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया. नंवबर  1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय सिंगापुर में जापानी सेना के खिलाफ जंग लड़ने भेजे गए. 1942 को जापानी सेना ने इनकी टुकड़ी को बंदी बना लिया. इसके बाद इनको मलेशिया और कोलंबपुर जेल में रखा गया. बाद में सुभाष चंद्र बोस के साथ जापानी सेना का समझौता होने पर इनको वहां से मुक्त करवाया गया.

इसके तुरंत बाद वह बोस की सेना में शामिल हो गए. इन्होंने 1942 से 1945 तक अंग्रेजों के खिलाफ कई लड़ाइयां  लड़ी. इस दौरान वह एक बार फिर इंफाल, रंगून आदि जेलों में भी रहै.