नई दिल्ली. भारत की अर्थव्यवस्था ने जुलाई–सितंबर तिमाही में लगातार दूसरी बार उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए 8.2% GDP growth दर्ज की है। लेकिन इस मजबूत आंकड़े ने एक बार फिर GDP calculation method और MoSPI data reliability को लेकर बहस छेड़ दी है। वजह यह है कि तिमाही GDP के आंकड़े कई high-frequency economic indicators से मेल नहीं खाते दिख रहे हैं।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: आंकड़ों में बड़ा अंतर
वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में real GDP growth औसतन 8% रही। इस दौरान manufacturing sector GVA में 8.4% की बढ़ोतरी दिखाई गई, जो कुल GVA ग्रोथ (8.1%) से भी ज्यादा है। लेकिन दूसरी ओर, Index of Industrial Production (IIP) के आंकड़े अलग कहानी बताते हैं। अप्रैल–सितंबर के दौरान industrial growth सिर्फ 3.2% रही, जबकि manufacturing output growth 4.2% तक सीमित रही।
GDP में घटती मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी
चिंता की बात यह भी है कि भारत की GDP में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी लगातार घट रही है।
2011-12 में: 16.1%
2024-25 में: 12.6% (बिना महंगाई समायोजन)
यानी GDP में योगदान घट रहा है, लेकिन तिमाही ग्रोथ आंकड़े अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत दिखाए जा रहे हैं।
हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स भी नहीं दे रहे सपोर्ट
GDP के मजबूत आंकड़ों के बावजूद कई monthly economic data संकेत कमजोर रहे हैं:
Domestic air passenger traffic: जुलाई–सितंबर के हर महीने में पिछले साल से कम रहा
पूरे क्वार्टर में हवाई यात्रियों की संख्या 1.8% घटी, जबकि अप्रैल–जून में 5.3% की बढ़ोतरी थी
Foreign tourist arrivals 2025: हर महीने 2024 से कम
GST collection growth: नवंबर में लगभग स्थिर, अक्टूबर में भी सिर्फ 4.6%
जहां एक ओर India GDP growth 2025 मजबूत दिख रही है, वहीं मासिक और हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा इस ग्रोथ को पूरी तरह सपोर्ट नहीं कर पा रहा। इससे यह सवाल फिर खड़ा हो गया है कि क्या तिमाही GDP आंकड़े ज़मीनी हकीकत को सही तरह से दर्शा रहे हैं, या फिर statistical methods में किसी तरह का mismatch मौजूद है।
