फल, फूल और सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए खुशखबरी, बीमा योजना में शामिल करने की तैयारी

फल, फूल और सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए खुशखबरी, बीमा योजना में शामिल करने की तैयारी- Panchayat Times

रांची. राज्य में फल, फूल और सब्जी उगाने वाले किसानों के लिए खुशखबरी है. राज्य सरकार अब इन फसलों को भी बीमा योजना में शामिल करने की तैयारी कर रही है. कृषि विभाग ने इसकी कवायद शुरू कर दी है. राज्य सरकार की इस नई पहल से सूबे के करीब दो लाख किसानों को फायदा होगा. जानकारों की मानें तो सूबे में इन फसलों की खेती करीब एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में की जाती है.

कृषि मंत्री बादल ने कहा है कि धान के फसल बीमा में अच्छा अनुभव नहीं रहा है. लिहाजा अब कड़े नियमों के साथ बीमा का निर्देश दिया जाएगा. बीमा कंपनियों को बीमा से पहले कुछ शर्तों को पूरा करना होगा ताकि आगे अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके. अभी तक बीमा कंपनियों ने फसल बीमा के नाम पर 466 करोड़ रुपए लिए हैं, जिसमें से 77 करोड़ ही पीड़ितों को मिला. ऐसे में अब किसानों को अधिक से अधिक लाभ देने की तैयारी है.

पुराने फसल बीमा की तरह हो सकता है सब्जियों का बीमा

अभी तक धान फसल के बीमा के लिए सरकार पूरा प्रीमियम देती है। इससे पहले कुछ प्रतिशत बीमाधारक प्रीमियम की रकम अदा करते थे और बाकी रकम सरकार देती थी. लेकिन विभागीय सूत्रों के अनुसार सब्जी , फल और फूल की फसल के बीमा में प्रीमियम काफी अधिक हो सकता है. इसलिए सरकार कुछ सब्सिडी दे सकती है लेकिन पूरा प्रीमियम नहीं दे सकती है.

किसान राहत कोष बनेगा

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसान राहत कोष का निर्माण कर रही है, जिसके तहत किसी भी तरह की फसल में क्षति होने पर तत्काल किसानों को इस कोष से राहत दी जा सके. मंत्री ने बताया कि इस कोष को 100 करोड़ रुपए की राशि से बनाया जा रहा है. खासकर उन किसानों को इससे लाभ मिलेगा जो बीमा की राशि का लंबा इंतजार नहीं कर सकते, जो छोटे व सीमांत किसान हैं.

सहकारिता पदाधिकारी मनोज कुमार बताते हैं कि नई फसल बीमा योजना से सब्जी, फल और फूल की खेती को बढ़ावा मिलेगा। फूल की खेती अभी तक सबसे कम क्षेत्र में हेाती है, लेकिन इस पहल के बाद किसान फूलों की खेती में अधिक काम करेंगे, जिससे राज्य को बंगाल व दूसरे राज्य के फूलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

पपीता-अमरूद की खेती बेहतर : राज्य में कई फल उगाए जाते हैं। इसमें पपीता,अमरूद का उत्पादन ज्यादा हैं। अब सरकारी योजनाओं में स्ट्राबेरी की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए पलामू में प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाने की तैयारी है। दूसरी ओर सब्जियों में टमाटर, बैगन, मिर्च, अदरक, आलू की व्यापक पैमाने पर खेती होती है। अधिकतर किसानों की जीविका इन्ही खेती पर निर्भर है।