16 राज्यों की सभी पंचायतों में तेज इंटरनेट को लेकर भारतनेट परियोजना में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का ऐलान जानिए इससे ग्रामीण भारत की कनेक्टिविटी में कितना आयेगा बदलाव और कहां तक पहुंची है ये योजना

16 राज्यों की सभी पंचायतों में तेज इंटरनेट को लेकर भारतनेट परियोजना में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का ऐलान जानिए इससे ग्रामीण भारत की कनेक्टिविटी में कितना आयेगा बदलाव और कहां तक पहुंची है ये योजना - Panchayat Times

नई दिल्ली. 30 जून को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से भारतनेट परियोजना के कार्यान्वयन के लिये 19,041 करोड़ रुपए (कुल 29,430 करोड़ रुपए के खर्च में से) तक की व्यवहार्यता अंतराल अनुदान (Viable Gap Funding) सहायता को मंजूरी दे दी. इसके तहत ग्राम पंचायतों सहित अनुमानित 3.61 लाख गांवों को शामिल किया जाएगा.

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership- PPP) प्रक्रिया में एक सरकारी एजेंसी और एक निजी क्षेत्र की कंपनी के बीच सहयोग शामिल है जिसका उपयोग परियोजनाओं के वित्तपोषण, निर्माण और संचालन के लिये किया जा सकता है. दूरसंचार के इस महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में PPP मॉडल एक नई पहल है.

क्या होता है व्यवहार्यता अंतराल अनुदान

व्यवहार्यता अंतराल अनुदान (Viability Gap Funding) एक ऐसा अनुदान होता है जो सरकार द्वारा ऐसे आधारभूत ढांचा परियोजना को प्रदान किया जाता है जो आर्थिक रूप से उचित हो लेकिन उनकी वित्तीय व्यवहार्यता कम हो (Economically Justified but not Financially Viable), ऐसा अनुदान दीर्घकालीन परिपक्वता अवधि वाली परियोजना को प्रदान किया जाता है. 

क्या है ये पूरी योजना

योजना के तहत ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग कर विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी कार्यक्रम है और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख मिशन भी. भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड, भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत 1,000 करोड़ रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ स्थापित एक विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose Vehicle) है.

यह राज्यों और निजी क्षेत्र की साझेदारी में डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करने के लिए गैर-भेदभावपूर्ण आधार पर सभी घरों के लिये 2Mbps से 20Mbps व सभी संस्थानों को उनकी मांग क्षमता के अनुसार सस्ती ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिये एक्सेस किया जा सकता है. इसे संचार मंत्रालय के तहत दूरसंचार विभाग द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है.

कब किया गया था लांच

अक्तूबर 2011 में नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (National Optical Fibre Network- NOFN) को लॉन्च किया गया था, वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर भारत नेट प्रोजेक्ट (Bharat Net Project) कर दिया गया.

नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने हेतु एक मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से एक सूचना सुपरहाइवे के रूप में सोचा गया था. वर्ष 2019 में संचार मंत्रालय ने संपूर्ण देश भर में ब्रॉडबैंड सेवाओं की सब तक और समान पहुंच की सुविधा हेतु ‘राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन’ भी शुरू किया था.

कौन कर रहा है खर्च

इस पूरी परियोजना को यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOF) द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है, जिसे देश के ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं में सुधार के उद्देश्य से स्थापित किया गया था.

क्या है लक्ष्य

इसका उद्देश्य ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस (e-governance), ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-बैंकिंग, इंटरनेट और अन्य सेवाओं के वितरण को सुगम बनाना है.

कहां तक पहुंची है परियोजना

प्रथम चरण

दिसंबर 2017 तक भूमिगत ऑप्टिक फाइबर केबल (Optic Fibre Cable- OFC) लाइन बिछाकर एक लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना.

दुसरा चरण

मार्च 2019 तक भूमिगत फाइबर, बिजली लाइनों पर फाइबर, रेडियो और सैटेलाइट मीडिया के उपयोग से देश की सभी ग्राम पंचायतों को कनेक्टिविटी प्रदान करना.

तीसरा चरण

वर्ष 2019 से 2023 तक एक अत्याधुनिक, फ्यूचर-प्रूफ नेटवर्क के तहत जिलों और ब्लॉकों के मध्य फाइबर को विस्तारित करने हेतु रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) का उपयोग किया जाएगा.

भारतनेट का वर्तमान विस्तार

इस परियोजना को 16 राज्यों में ग्राम पंचायतों में बसे हुए सभी गांवों में विस्तारित किया जाएगा जो इस प्रकार हैं:-

केरल, कर्नाटक, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश.

संशोधित रणनीति में निजी क्षेत्र के भागीदारों द्वारा भारतनेट का निर्माण, उन्नयन, संचालन, रखरखाव और उपयोग शामिल होगा जिसे प्रतिस्पर्द्धी अंतर्राष्ट्रीय बोली प्रक्रिया द्वारा चुना जाएगा.

चयनित निजी क्षेत्र के भागीदार से पूर्वनिर्धारित सेवा स्तर समझौते (Services Level Agreement- SLA) के अनुसार विश्वसनीय, उच्च गति ब्रॉडबैंड सेवाएँ प्रदान करने की उम्मीद है.

भारतनेट में प्राइवेट निवेश का महत्त्व

PPP मॉडल संचालन, रखरखाव, उपयोग व राजस्व बढ़ाने के लिये निजी क्षेत्र का लाभ उठाएगा और इसके परिणामस्वरूप भारतनेट का तेजी से लांच होने की उम्मीद है.

बढ़ेगा निवेश

निजी क्षेत्र के भागीदार से एक इक्विटी निवेश लाने और पूंजीगत व्यय के लिये और नेटवर्क के संचालन एवं रखरखाव हेतु संसाधन जुटाने की उम्मीद है.

बेहतर होगी पहुंच

बसे हुए सभी गांवों में भारतनेट का विस्तार विभिन्न सरकारों द्वारा दी जाने वाली ई-सेवाओं तक बेहतर पहुंच को सक्षम करेगा, साथ ही यह ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, कौशल विकास, ई-कॉमर्स और ब्रॉडबैंड के अन्य अनुप्रयोगों को भी सक्षम करेगा.