रक्षाबंधन से जन्माष्टमी तक हर घर में गोगा जी महाराज की कथा

पूरे प्रदेश सहित जोगिंद्रनगर क्षेत्र में घर-घर गोगा जी महाराज - Panchayat Times
जोगिंद्रनगर के भराडू क्षेत्र में लोगों के घर-घर जाकर गोगा महाराज की गाथा का विवरण करते मंडलीय सदस्य

जोगिंद्रनगर (मंडी). रक्षाबंधन पर्व के साथ ही पूरे प्रदेश सहित जोगिंद्रनगर क्षेत्र में घर-घर गोगा जी महाराज की गाथा का भी शुभारंभ हो गया. गाथा का शुभारंभ रक्षाबंधन के पवित्र त्यौहार से शुरू होकर जन्माष्टमी तक घर-घर सुनाई जाती है. गोगाजी महाराज को राजा छतरी जाहरवीर के नाम से भी जाना जाता है.

लोक कथाओं के अनुसार गोगाजी महाराज को सांपों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है. लोग उन्हें गोगा जी और जाहरवीर के नाम से भी क्षेत्र में पुकारतें हैं. कहा जाता है कि गोगा महाराज गुरू गोरखनाथ के प्रमुख शिष्यों में से एक थे. राजस्थान के लगभग छ: सिद्धों में गोगा जी को प्रथम हासिल है. रक्षाबंधन से लेकर जन्माष्टमी तक गोगा महाराज के मंडलीदार उनकी छतरी को साथ लेकर गांव-गांव तथा घर-घर जा कर जनता के सुखमयी जीवन की कामना करते हैं. लोग श्रद्धा से उनकी छतरी पर डोरियां, चूडिय़ां तथा श्रृंगार का सामान सहित कपड़े की कितरे इत्यादी बांध कर मंगल कामना करते देखे जा सकते हैं.

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बताया जाता है कि गोगा जी महाराज की माँ बाछल देवी नि:संतान थी. संतान की कामना के प्रयत्न करने के बाद भी संतान सुख जब उन्हें नहीं मिला तो वे गोगामेड़ी के टिले पर तपस्या कर रहे गुरू गोरखनाथ की शरण में पहुंची. कहते हैं कि उस समय गुरू गोरखनाथ ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया. प्रसाद खा कर बाछल देवी गर्भवती हो गई और उसके बाद गोगा जी महाराज का जन्म हुआ. गुगल फल के नाम से इनका नाम गोगामल पड़ा.
श्रद्धा और विश्वास

गुरू गोरखनाथ के आशिर्वाद से महाराज गोगामल महावीर नागों को वश में करने वाले तथा सिद्धोंं के शिरोमणी हुए. उनके मंत्र जाप से वासुकी जैसा महानाग के विष का प्रभाव भी शांत हो गया था. कहा जाता है कि उनकी कथा सुनने मात्र से सभी प्रकार के कष्टों और सर्प भय से मनुष्य को मुक्ति मिल जाती है. हिमाचल के साथ-साथ गोगा महाराज का पर्व पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली आदी जगहों पर बहुत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है.
सकमांद गांव में गोगा महाराज का मंदिर

जोगिंद्रनगर विधानसभा के मसौली पंचायत के डिभणु गांव के पास और निचला भड़याड़ा पंचायत के सकमांद गांव में गोगा महाराज का मंदिर स्थापित है. जगदीश चंद, रमेश कुमार, ज्ञानचंद और खेमाराम गांव गड़ूहीं मंडलीदार का कहना है कि आज की चकाचौंध के चलते लोग और यूवा अपनी पुरानी धरोहर और संस्कृति को भूलते जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पुरानी धरोहर और संस्कृति को संजोए तथा कायम रखने के लिए सरकार को इस ओर पग उठाने चाहिए ताकि पुरानी संस्कृति और अमुल्य धरोहर को कायम रखा जा सके.

जन्माष्टमी के अगले दिन नवमीं को पूरा…

उन्होंने कहा कि आज से जिला मंडी में घर-घर जा कर गोगा महाराज जी की मंडली के सदस्य भगवान गोगा महाराज का गुणगान शुरू करते हैं. उन्होंने बताया कि इस मंडली के सदस्य नंगे पांव हाथों में छत्र लेकर घर-घर घूम कर गोगा महाराज की कथाएं सुनाते हैं. रक्षाबंधन से सात दिनों तक गोगा महाराज की कथाएं सुनने से सुख की प्राप्ती होती है और इंसान के दु:ख दर्द दूर होते हैं. गोगा महारज की कथा का गुणगान जन्माष्टमी के अगले दिन नवमीं को पूरा हो जाता है.