हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, अब ब्लॉक स्तर पर मनाया जाएगा ‘वेटरन्स डे’

गुरुग्राम. 14 जनवरी को मनाए जाने वाले आर्म्ड फोर्सेज वेटरन्स डेपर हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ओएसडी लेफ्टिनेंट जर्नल (सेवानिवृत्त) केजे सिंह मंगलवार को गुरुग्राम पहुंचे. केजे सिंह ने बताया कि इन दिनों ठंड और कोहरा ज्यादा होने की वजह से भूतपूर्व सैनिकों के किसी एक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करना कठिन है. इसलिए हरियाणा सरकार ने इसे पूरे सप्ताह मनाने का निर्णय लिया है. इसकी शुरुआत गुरुग्राम से की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे सप्ताह में ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. हरियाणा सरकार ने पूर्व सैनिकों को पहुंचाया बड़ा फायदा मुख्यमंत्री के ओएसडी केजे सिंह ने बताया कि हरियाणा सरकार ने कैशलेस, पेपर लैस तथा फेसलैस गवर्नेंस नीति का पालन करते हुए भूतपूर्व सैनिकों को बड़ा फायदा पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि भूतपूर्व सैनिकों के पहचान पत्र के लिए आवेदन आन लाइन प्राप्त किए जाएंगे. बता दें कि मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ओएसडी लेफ्टिनेंट जर्नल (सेवानिवृत्त) के जे सिंह की अध्यक्षता में गुरूग्राम के लोक निर्माण विश्रामगृह में प्रदेश के सभी जिला सैनिक बोर्डों के सचिवों के साथ आयोजित बैठक हुई जिसमें यह जानकारी दी गई. अब मुख्यालय नहीं घर बैठे होगा काम जर्नल सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार के ई-गवर्नेंस नीति के तहत भूतपूर्व सैनिकों को अब जिला मुख्यालय आने की जरूरत नहीं रहेगी. ये सेवाएं उन्हें नजदीक ही मिल सकेंगी. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूर्व सैनिकों के पहचान पत्र बनाने के लिए आवेदन मानवीय तौर पर बोर्ड के कार्यालय में लिए जाते हैं. यही कार्य आनलाइन होने पर वे अपना आवेदन भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपने घर के नजदीक किसी भी कम्प्यूटर सेंटर पर जाकर अपलोड कर सकेंगे. पूर्व सैनिक अपने दस्तावेजों को रखें दुरुस्त जर्नल सिंह ने बीते मंगलवार को गुरुग्राम में आयोजित बैठक में जिला सैनिक बोर्डों के सचिवों तथा हैड क्लर्कों से समस्याएं सुनने के साथ-साथ बेहतरी के लिए सुझाव भी मांगे. इस बैठक में विशेष रूप से सेना मुख्यालय दिल्ली से सैन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की रिकॉर्ड शाखा के प्रमुख कर्नल रणबीर सिंह को आमंत्रित किया गया था. जर्नल सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों के सामने बड़ी समस्या यह है कि उनके दस्तावेज ठीक हों. दस्तावेजों में उनके नाम अथवा स्पैलिंग में भर्ती के समय तथा बाद में कई बार बदलाव आ जाता है जिसके कारण सेवानिवृत्ति पर उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है. ये भी पढ़ें- हिंदी भाषा हरियाणा के लिए जरूरी है भाया बैठक में वायु सेना की अधिकारी रही अंजलि कौशिक जोकि एमडीआई गुरुग्राम में प्रोफेसर है ने ई-गवर्नेंस के बारे में सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि हरियाणा में पूर्व सैनिकों की संख्या लगभग ढ़ाई लाख है और उनके आश्रितों को भी मिलाएं तो संख्या लगभग 10 लाख हो जाती है. उन्होंने कहा कि सेवाएं ऑनलाइन होने से जिला सैनिक बोर्डों का कार्य 80 प्रतिशत तक घट सकता है. सेना मुख्यालय से आए कर्नल रणबीर सिंह ने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत सेवारत सैनिकों के रिकॉर्ड को आधार से लिंक कर दिया गया है और यह कार्य जारी है. बैठक में भी कुछ सचिवों ने पूर्व सैनिकों के रिकॉर्ड को भी आधार से लिंक करने की सलाह दी थी.

गुरुग्राम. 14 जनवरी को मनाए जाने वाले आर्म्ड फोर्सेज वेटरन्स डे पर हरियाणा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ओएसडी लेफ्टिनेंट जर्नल (सेवानिवृत्त) केजे सिंह मंगलवार को गुरुग्राम पहुंचे. केजे सिंह ने बताया कि इन दिनों ठंड और कोहरा ज्यादा होने की वजह से भूतपूर्व सैनिकों के किसी एक स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करना कठिन है. इसलिए हरियाणा सरकार ने इसे पूरे सप्ताह मनाने का निर्णय लिया है. इसकी शुरुआत गुरुग्राम से की गई है. उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे सप्ताह में ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

हरियाणा सरकार ने पूर्व सैनिकों को पहुंचाया बड़ा फायदा

मुख्यमंत्री के ओएसडी केजे सिंह ने बताया कि हरियाणा सरकार ने कैशलेस, पेपर लैस तथा फेसलैस गवर्नेंस नीति का पालन करते हुए भूतपूर्व सैनिकों को बड़ा फायदा पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि भूतपूर्व सैनिकों के पहचान पत्र के लिए आवेदन आन लाइन प्राप्त किए जाएंगे. बता दें कि मंगलवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ओएसडी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के जे सिंह की अध्यक्षता में गुरूग्राम के लोक निर्माण विश्रामगृह में प्रदेश के सभी जिला सैनिक बोर्डों के सचिवों के साथ आयोजित बैठक हुई जिसमें यह जानकारी दी गई.

अब मुख्यालय नहीं घर बैठे होगा काम

जनरल सिंह ने कहा कि हरियाणा सरकार के ई-गवर्नेंस नीति के तहत भूतपूर्व सैनिकों को अब जिला मुख्यालय आने की जरूरत नहीं रहेगी. ये सेवाएं उन्हें नजदीक ही मिल सकेंगी. उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूर्व सैनिकों के पहचान पत्र बनाने के लिए आवेदन मानवीय तौर पर बोर्ड के कार्यालय में लिए जाते हैं. यही कार्य आनलाइन होने पर वे अपना आवेदन भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपने घर के नजदीक किसी भी कम्प्यूटर सेंटर पर जाकर अपलोड कर सकेंगे.

पूर्व सैनिक अपने दस्तावेजों को रखें दुरुस्त

जनरल सिंह ने बीते मंगलवार को गुरुग्राम में आयोजित बैठक में जिला सैनिक बोर्डों के सचिवों तथा हैड क्लर्कों से समस्याएं सुनने के साथ-साथ बेहतरी के लिए सुझाव भी मांगे. इस बैठक में विशेष रूप से सेना मुख्यालय दिल्ली से सैन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की रिकॉर्ड शाखा के प्रमुख कर्नल रणबीर सिंह को आमंत्रित किया गया था. जनरल सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों के सामने बड़ी समस्या यह है कि उनके दस्तावेज ठीक हों. दस्तावेजों में उनके नाम अथवा स्पैलिंग में भर्ती के समय तथा बाद में कई बार बदलाव आ जाता है जिसके कारण सेवानिवृत्ति पर उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है.

ये भी पढ़ें- हिंदी भाषा हरियाणा के लिए जरूरी है भाया

बैठक में वायु सेना की अधिकारी रही अंजलि कौशिक जोकि एमडीआई गुरुग्राम में प्रोफेसर है ने ई-गवर्नेंस के बारे में सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि हरियाणा में पूर्व सैनिकों की संख्या लगभग ढ़ाई लाख है और उनके आश्रितों को भी मिलाएं तो संख्या लगभग 10 लाख हो जाती है. उन्होंने कहा कि सेवाएं ऑनलाइन होने से जिला सैनिक बोर्डों का कार्य 80 प्रतिशत तक घट सकता है. सेना मुख्यालय से आए कर्नल रणबीर सिंह ने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत सेवारत सैनिकों के रिकॉर्ड को आधार से लिंक कर दिया गया है और यह कार्य जारी है. बैठक में भी कुछ सचिवों ने पूर्व सैनिकों के रिकॉर्ड को भी आधार से लिंक करने की सलाह दी थी.