नई दिल्ली. हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने गुरुवार को एक अहम विधेयक पारित करते हुए दलबदल कानून (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्य ठहराए गए विधायकों को पेंशन लाभ से वंचित करने का फैसला लिया है। विधानसभा ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मार्च 2024 में स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने छह विधायकों को अयोग्य घोषित किया था।
पहली बार विधायक बने कुछ नेताओं की पेंशन पात्रता खत्म
चैतन्य शर्मा और देवेंद्र भुट्टो जैसे नेताओं पर पड़ेगा सीधा असर नए प्रावधानों के तहत पहली बार विधायक बने चैतन्य शर्मा (गगरेट) और देवेंद्र भुट्टो (कुटलैहड़) अब पेंशन के पात्र नहीं रहेंगे। वहीं, रवि ठाकुर और राजिंदर राणा, जो बाद में विधानसभा उपचुनाव हार गए थे, उन्हें भी 14वीं विधानसभा कार्यकाल के लिए पेंशन नहीं मिलेगी। हालांकि, सुधीर शर्मा और इंदर दत्त लखनपाल, जो दोबारा निर्वाचित हो चुके हैं, इस नए कानून से प्रभावित नहीं होंगे।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद हुई थी कार्रवाई
कांग्रेस के छह विधायकों को पार्टी व्हिप उल्लंघन और क्रॉस वोटिंग के चलते किया गया था अयोग्य ये छह विधायक मूल रूप से कांग्रेस से जुड़े थे, लेकिन फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान इन्होंने BJP उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। इसके अलावा, इन विधायकों पर बजट और कट मोशन के दौरान कांग्रेस सरकार के समर्थन में मतदान न करने और पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने का भी आरोप था। इन्हीं कारणों से इन्हें दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था।
CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पेश किया था बिल
मुख्यमंत्री बोले- यह कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए नहीं, जनादेश का सम्मान बचाने के लिए है इस विधेयक को बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में पेश किया था। बिल का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य कांग्रेस को राजनीतिक लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि उन जनप्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाना है, जिन्होंने जनता के जनादेश के खिलाफ जाकर काम किया। उन्होंने कहा कि राज्य की 75 लाख जनता ने 2024 में निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने की कोशिशों को देखा है।
मौजूदा विधानसभा कार्यकाल के बाद ही लागू होगा नया कानून
CM सुक्खू ने स्पष्ट किया- संशोधन वर्तमान विधानसभा पर लागू होगा, लेकिन प्रभाव बाद में दिखेगा मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी साफ किया कि यह संशोधन मौजूदा विधानसभा पर लागू होगा, लेकिन इसका प्रभाव वर्तमान कार्यकाल पूरा होने के बाद ही सामने आएगा। इससे सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि यह कदम भविष्य में दलबदल को हतोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
BJP ने बिल को बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई
विपक्ष का आरोप- कुछ विधायकों को निशाना बनाने के लिए लाया गया कानून विधानसभा में BJP ने इस बिल का कड़ा विरोध किया और इसे राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया। BJP विधायक रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि यह कानून कुछ चुनिंदा विधायकों की पेंशन रोकने के लिए लाया गया है और यह कानूनी जांच में टिक नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का कदम विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाता है और सरकार की संकीर्ण सोच को दर्शाता है।
जयराम ठाकुर ने उठाया Retrospective Effect का मुद्दा
विपक्ष के नेता बोले- दलबदल विरोधी कानून मजबूत करना सही, लेकिन पीछे से लागू करना उचित नहीं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि दलबदल विरोधी प्रावधानों को मजबूत करना सही हो सकता है, लेकिन पिछली घटनाओं पर प्रभाव डालने वाला कानून बनाना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अयोग्य घोषित विधायकों और उनके परिवारों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए और उनकी संपत्तियों का भी सर्वे कराया गया।
BJP ने कहा- एक बार विधायक बनने के बाद पेंशन और लाभ मिलना चाहिए
त्रिलोक जामवाल बोले- चुनाव हारने के बाद भी पूर्व विधायकों को मिलते रहे हैं लाभ BJP विधायक त्रिलोक जामवाल ने कहा कि इतिहास में ऐसा होता रहा है कि पूर्व विधायक चुनाव हारने के बाद भी पेंशन और अन्य लाभ लेते रहे हैं। उनका तर्क था कि एक बार कोई व्यक्ति विधायक निर्वाचित होकर पद संभाल लेता है, तो वह उसी समय से इन लाभों का हकदार हो जाता है, चाहे बाद में कोई कानूनी या राजनीतिक स्थिति क्यों न बन जाए।
सरकार का जवाब- दलबदल रोकने के लिए जरूरी था यह कदम
संसदीय कार्य मंत्री और राजस्व मंत्री ने कहा- विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लाया गया बिल विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह विधेयक राजनीतिक दलबदल पर रोक लगाने के लिए लाया गया है। उन्होंने BJP पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर जिस तरह प्रतिक्रिया दे रहा है, उससे ऐसा संदेश जाता है कि वह दलबदल जैसी प्रवृत्तियों का समर्थन करता है। वहीं, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह बिल विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही लाया गया है और इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं है।
हिमाचल की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाला फैसला
दलबदल करने वाले विधायकों के लिए सख्त संकेत, आने वाले समय में बढ़ सकती है सियासी बहस हिमाचल प्रदेश विधानसभा का यह फैसला राज्य की राजनीति में बड़ा और प्रतीकात्मक संदेश देने वाला माना जा रहा है। इससे साफ संकेत गया है कि अब जनादेश के खिलाफ जाने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक स्तर पर भी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, BJP के विरोध और कानूनी सवालों को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन सकता है।
