हिमाचली खेती और गीत का अनूठा संगम, आप भी सुनिए

सोलन. इन दिनो नौणी विश्वविद्यालय में माईक्रो इरीगेशन तकनीक पर प्रशिक्षण लेने पहुंचे ऊना के किसान बलविंद्र सिंह प्रदेश भर से आए किसानों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने हुए हैं. इन्होंने खेती को बढ़ावा देने के उदेशय से कई गीत लिखे हैं. इनका मानना है कि प्रदेश मे खेती एक फायदे का सौदा है इसे यदि मन लगा कर और बिना किसी तनाव के किया जाए तो प्रदेश के किसानों को इसका काफी लाभ पहुंच सकता है. इसी बात को देखते हुए इस किसान ने खेती करने का एक नया तरिका निकाला है. जिसमें किसान खेती से संबधित गीतों को गुनगुना कर बिना तनाव के खेती कर सकता है.

बलविंद्र ने अभी तक शुन्य लागत खेती, मधुमक्क्खीपालन और सेब के महत्व के साथ-साथ किसानों को अपने उत्पाद की मार्केटींग करने में जो भी समस्याएं आती हैं उन पर कई गीत लिखे हैं. जिन्हे जल्दी ही वे किसानों तक पहुंचाने जा रहे हैं. जिला ऊना के रहने वाले किसान बलविंद्र सिंह की इस तरह की पहल से नौणी विवि में प्रशिक्षण लेने पहुंचे प्रदेशभर के किसान काफी सराह रहे हैं. किसानों का मानना है बलविंद्र सिंह के खेती की विभिन्न तकनीक को बताने वाले और मोटीवेशनल गीतों के जरिए खेती को काफी आसान और मजेदार बनाया जा सकता है.

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किसान बलविंद्र सिंह ने बताया कि उन्होने किसानों को जागरूक करने के उदेशय से शुन्य लागत खेती, देसी गाय के महत्व और मधुमक्खी के महत्व आदि पर कई गाने लिखे हैं जिसे जल्द ही वे किसानों तक पहुंचाएंगे और निश्चित तौर पर किसानों को इन गीतों से मोटीवेशन मिलेगा और वे बिना किसी तनाव के खेती कर सकेंगे.

किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वे इन दिनो नौणी विवि मे बलविंद्र सिंह के साथ ही प्रशिक्षण ले रहे हैं और बलविंद्र सिंह के खेती-बाड़ी से जुड़े गीत उन्हें और अन्य किसानों को काफी प्रभावित कर रहें हैं. इनके गीतों के माध्यम से खेती को और भी सरल बनाया जा सकता है.