हिमाचल में 11,000 फीट की ऊंचाई पर हींग की खेती के लिए पायलट परियोजना के तहत 5,000 वर्ग मीटर में रोपे गए हींग के पौधे : वीरेद्रं कंवर

हिमाचल में 11,000 फीट की ऊंचाई पर हींग की खेती के लिए पायलट परियोजना के तहत 5,000 वर्ग मीटर में रोपे गए हींग के पौधे : वीरेद्रं कंवर - Panchayat Times

शिमला. हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है. प्रदेश के 90 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं एंव 62 प्रतिशत लोग सीधे तौर पर कृषि पर निर्भर है. राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि व इससे जुड़े क्षेत्रों का लगभग 12.73 प्रतिशत योगदान है.

11,000 फीट की ऊंचाई पर हींग की खेती के लिए राज्य में पायलट परियोजना सफलतापूर्वक शुरू

वहीं अब प्रदेश के बर्फीले ठंडे रेगिस्तान लाहौल-स्पीति जिले में समुद्रतल से लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर हींग की खेती के लिए राज्य में पायलट परियोजना सफलतापूर्वक शुरू की गई है.

15 अक्तूबर 2020 को हुई थी बीजारोपण कार्यक्रम की शुरुआत

प्रदेश के कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि कवारिंग गांव में 15 अक्तूबर 2020 को हींग के बीजारोपण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. कवारिंग, मडग्राम, मोबीसेरी, कल्पा तथा पूह के ऊंचे हिमालयन क्षेत्रों में पांच हजार वर्ग मीटर में पायलट आधार पर हींग के पौधे रोपे गए हैं.

नए क्षेत्रों में भी तलाशी जाएंगी संभावनाएं

मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने बताया कि लाहौल-स्पीति, किन्नौर तथा मंडी जिलों के ऊंचे हिमालयी बर्फीले क्षेत्रों में पांच साल में 302 हेक्टेयर क्षेत्र में हींग की खेती कर देश को हींग उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जाएंगे.

पायलट परियोजना के तहत कवर किए क्षेत्रों से सटे नए क्षेत्रों में हींग की खेती की संभावनाएं तलाशी जाएंगी. पालमपुर सीएसआईआर तथा कृषि विभाग के वैज्ञानिक पायलट परियोजना का बारीकी से आकलन कर रहे हैं. प्रदेश में हींग की खेती के लिए न्यूनतम 5 से 10 डिग्री तापमान तथा ऊंचे बर्फीले हिमालयी क्षेत्र अनुकूल माने जाते हैं.

सालाना औसतन 100-350 मिलीमीटर वर्षा

इन क्षेत्रों में सालाना औसतन 100-350 मिलीमीटर वर्षा होती है. हींग की खेती से जुड़े किसानों को बीज, पौधे, प्रशिक्षण तथा ढांचागत सुविधाएं राज्य के कृषि विभाग के माध्यम से मुफ्त दी जाएंगी. अभी देश में हींग का आयात अफगानिस्तान तथा ईरान से किया जाता रहा है.