18वें एशियन गेम्स में हिमाचल की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान

18वें एशियन गेम्स में हिमाचल की बेटियों ने बढ़ाया देश का मान

नई दिल्ली. इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में चल रहे 18वें एशियाई खेलों में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया है. इस जीत में हिमाचल प्रदेश की तीन महिला खिलाड़ियों मनाली कविता ठाकुर, सिरमौर के शिलाई की प्रियंका नेगी और रितु नेगी का विशेष योगदान रहा. इस जीत पर हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जीत की बधाई देते हुए कहा कि हर्ष की बात है कि इस टीम में हिमाचल की 3 बेटियां भी शामिल हैं. हमें बेटियों पर गर्व है जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया.

एशियन गेम्स में फाइनल में भले ही भारतीय महिला कबड्डी टीम गोल्ड मेडल नहीं जीत पाई लेकिन टीम को सिल्वर मेडल मिलने पर हिमाचल के मनाली और सिरमौर में उत्सव जैसा माहौल है.

भारतीय महिला कबड्डी टीम को इस बार 18वें एशियन गेम्‍स के छठे दिन शुक्रवार को गोल्ड मेडल से हाथ धोना पड़ा. भारतीय महिला कबड्डी टीम को ईरान के खिलाफ फाइनल मुकाबले में 24-27 से मिली हार के कारण सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. एशियाई खेलों में ईरान की महिला टीम को पहली बार कबड्डी में गोल्ड मेडल हासिल हुआ है, वहीं भारतीय टीम अपने गोल्ड मेडल की हैट्रिक नहीं लगा पाई. भारतीय टीम ने 2010 और 2014 में हुए एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था.

ढाबे में बर्तन धोने से लेकर एशियन गेम्स तक कविता ठाकुर का संघर्षमय रहा है सफर:

भारतीय महिला कबड्डी टीम की खिलाड़ी कविता ठाकुर किसी पहचान की मोहताज़ नहीं. 2014 एशियाई खेलों में भारतीय महिला कबड्डी टीम को गोल्ड मेडल दिलाने में कविता ठाकुर का अहम किरदार था. भारतीय महिला कबड्डी टीम में कविता को सबसे मजबूत खिलाड़ी के रुप में देखा जाता है लेकिन उनका यहां तक का सफर बेहद मुश्किल और कांटों भरा रहा है.

कविता ने बचपन में गरीबी को बहुत करीबी से देखा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें बचपन में ढाबे में बर्तन धोने के साथ झाडू-पोछा के अलावा कई काम करने पड़ते थे. हिमाचल प्रदेश की कपकपाती ठंड में कविता दुकान के पीछे बने फ्लोर पर ऐसे ही सो जाती थीं. उनके पास तन ढकने के लिए न ज्यादा गर्म कपड़े थे और न ही कंबल.

दरअसल कविता का ज्यादातर बचपन मनाली से 6 किमी दूर जगतसुख गांव में स्थित एक ढाबे गुज़रा है जो उनके पिता पृथ्वी सिंह चलाते हैं. मां कृष्णा देवी चाय बनाने और खाने-पीने का सामान तैयार करती हैं. कविता की किस्मत उस वक्त पलट गई जब 2014 एशियाड में उन्होंने कबड्डी में गोल्ड मेडल जीता. गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम की खिलाड़ी कविता के हुनर को देखते हुए राज्य सरकार ने भी उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाए और पूरी जिंदगी ढाबे में व्यतीत करने वाले उनके परिवार को मनाली में नया आशियाना मिल गया जिसकी बुनियाद कविता ने कबड्डी खेलने के साथ खड़ी की थी. हालांकि घर अभी भी किराए पर है लेकिन जिंदगीकाफी आसान हो गई है.

पुलिस विभाग में सबइंस्पेक्टर हैं प्रियंका नेगी:

स्पोर्ट्स हॉस्टल बिलासपुर में प्रशिक्षण लेने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर तक कबड्डी में धाक जमाने वाली खिलाड़ी प्रियंका नेगी हिमाचल पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर हैं. वर्ष 2006 से स्पोर्ट्स हॉस्टल बिलासपुर में कबड्डी का प्रशिक्षण ले रहीं प्रियंका नेगी शिलाई (सिरमौर) की रहने वाली हैं.

प्रियंका ने 2011 में श्रीलंका में हुई साउथ एशियन गेम्स, 2012 में पटना में फर्स्ट वुमन कबड्डी वर्ल्ड कप तथा 2013 में चीन में थर्ड एशियन बीच गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. इसके अलावा नेशनल गेम्स में करीब 15 मेडल जीत चुकी हैं. वर्ष 2012 में प्रियंका नेगी को परशुराम अवार्ड से भी नवाजा गया है.उनके पिता कंवर सिंह नेगी किसान हैं, जबकि माता सुनिता नेगी गृहिणी हैं.

भारतीय टीम की डिफेंडर रितु नेगी:

इंडोनेशिया के जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में सिरमौर जिले के अति दुर्गम शिलाई क्षेत्र की रितु नेगी का डंका रहा. नॉर्थ जोन की कप्तानी कर चुकी हैं रितु नेगी भारतीय टीम की डिफेंडर हैं, लेकिन हिमाचल सरकार ने अभी तक उनके लिए खास नहीं किया. वे भारतीय रेलवे में सेवाएं दे रही हैं. हिमाचल सरकार ने रितु को नौकरी नहीं दी है. पिता भवान सिंह पेशे से जेबीटी हैं. उन्होंने कहा कि बेटी ने 14 मेडल जीते हैं. 2011 में वे भारतीय कबड्डी टीम की कप्तान भी रही हैं. यदि अपने प्रदेश में नौकरी मिले तो वे हिमाचल की टीम से खेलते हुई राज्य का नाम रोशन कर सकती हैं.